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बेड की ऊंचाई पर विवाद…तीन सप्ताह से अधरझूल में हेड का निर्माण!

सीमावर्ती क्षेत्र में नहर के एफ डैश हेड का मामला, किसानों ने जताई पानी के असमान वितरण की आशंका

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श्रीकरणपुर. सीमावर्ती क्षेत्र में एफ डैश हेड का निर्माण करीब तीन सप्ताह से अधरझूल में है। हेड के बेड (तल या ठोकर) की ऊंचाई को लेकर विरोध कर रहे किसानों ने शुक्रवार को तीसरी बार इसका निर्माण रुकवा दिया। उनका कहना है कि बेड की ऊंचाई नियमानुसार नहीं है और इससे निकलने वाली तीनों वितरिकाओं (माइनर्स) में असमान पानी वितरण होगा।

जानकारी अनुसार करीब तीन सप्ताह पहले जल संसाधन विभाग की ओर से सीमावर्ती क्षेत्र में एफ नहर के टेल पर एफ डैश हेड का निर्माण शुरू किया गया। इस दौरान इसके बेड की ऊंचाई को लेकर वहां किसानों ने विरोध कर दिया और निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। इसके बाद वहां कुछ निर्माण कार्य हुआ लेकिन बेड की ऊंचाई को लेकर विवाद बढऩे से निर्माण अभी भी अधरझूल में है। ग्राम पंचायत ६१ एफ के सरपंच सरजीत सिंह, किसान कन्हैया लाल ६० एफ, चंद्रप्रकाश ६० एफ व हरनेक सिंह ६३ एफ सहित कई ५०-६० किसानों का कहना है कि इसके बेड की ऊंचाई आठ इंच होनी चाहिए जबकि यह केवल पांच इंच ही रखी गई है। किसानों का कहना है कि बेड की ऊंचाई कम होने से हेड से निकलने वाली तीनों वितरिकाओं (एफडी माइनर, ६० एफ का मोगा व एफ डैश माइनर) में असमान पानी वितरित होगा। उनका यह भी कहना है कि इससे एफडी माइनर में अधिक पानी जाने की संभावना है। किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने लापरवाही व मनमाने तरीके से हेड को रि-डिजाइन करते हुए इसके बेड की ऊंचाई भी कम कर दी। किसानों के विरोध के चलते जहां निर्माण कार्य अधरझूल में है वहीं पिछले सप्ताह पानी की बारी भी अस्थायी तरीके से पूरी की गई। समस्या के चलते वहां ६०, ६१, ६२ व ६३ एफ आदि के किसान लगातार नजर बनाए हुए हैं और कई किसान वहां धरना लगाने को भी मजबूर हैं।

जेइएन बोले- मामले की जानकारी नहीं!

मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए जेइएन जगमीत सिंह को संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने कहा कि यह हेड उनके क्षेत्र में नहीं है और इसकी पूरी जानकारी एइएन अतुल शर्मा से ही मिल सकती है। उधर, एइएन शर्मा ने बताया कि वे दस दिन से अवकाश पर हैं और जेइएन जगमीत सिंह से ही मामले की पूरी जानकारी मिल सकती है। हालांकि, बाद में उन्होंने प्रकरण को लेकर अपना पक्ष भी बता दिया।

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गलतफहमी का शिकार हैं किसान!

आइडीआर जयपुर से स्वीकृत डिजाइन और क्षमता का हेड निर्माण किया जा रहा था। इसके मुताबिक बेड की ऊंचाई पांच इंच रखी गई लेकिन किसी गलतफहमी के चलते किसान इसे आठ इंच ऊंचा करने की मांग कर रहे हैं। कम ऊंची ठोकर से किसानों को नुकसान कैसे हो सकता है। वहीं, असमान जल वितरण का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। किसानों के विरोध के चलते हेड का निर्माण कार्य अधरझूल में है। फिलहाल मामले को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

अतुल शर्मा, एइएन जल संसाधन विभाग श्रीकरणपुर।