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श्रीगंगानगर में साइबर ठगों के आगे पुलिस का धीमा प्रहार

बीते चार वर्षों में साइबर ठगों ने जिले के आम नागरिकों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों से करीब 25 करोड़ 25 लाख रुपए की ठगी कर ली-

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श्रीगंगानगर जिले में साइबर अपराध एक संगठित और तेज़ रफ्तार कारोबार बन चुका है, जबकि इसके मुकाबले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई बेहद सुस्त दिखाई दे रही है। आंकड़े खुद हालात की गंभीरता बयान कर रहे हैं।





बीते चार वर्षों में साइबर ठगों ने जिले के आम नागरिकों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों से करीब 25 करोड़ 25 लाख रुपए की ठगी कर ली, लेकिन इस भारी भरकम रकम में से पीड़ितों को सिर्फ 42 लाख 65 हजार 703रुपए वापस मिल पाई है।





साइबर सैल के रेकार्ड के अनुसार साइबर ठगी के मामलों में साइबर सेल की ओर से 3 करोड़ 82 लाख रुपए की राशि विभिन्न बैंकों में होल्ड जरूर कराई गई, लेकिन तकनीकी अड़चनों, कानूनी प्रक्रियाओं और समय पर समन्वय के अभाव में अधिकांश राशि पीड़ितों तक पहुंच ही नहीं पाई। यानी जिन पैसों पर ठगी के तुरंत बाद रोक लगी, वे भी लोगों की जेब में लौटने से पहले ही सिस्टम की फाइलों में उलझ गए।



ठग हाईटेक, सिस्टम स्लो

साइबर ठग लगातार अपने तरीकों को अपडेट कर रहे हैं। फर्जी कॉल, लिंक, केवाईसी अपडेट, डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर लालच हर दिन नया तरीका, नया जाल। दूसरी ओर, शिकायत दर्ज होने से लेकर जांच, बैंक समन्वय और कोर्ट प्रक्रिया तक सब कुछ इतना धीमा है कि ठग रकम निकालकर गायब हो जाते हैं और पीड़ित सिर्फ शिकायत नंबर लेकर रह जाता है। साइबर ठगी का शिकार बने लोगों में सबसे बड़ी शिकायत यही है कि समय पर रिपोर्ट करने के बावजूद राहत नहीं मिलती। कई मामलों में पीड़ितों ने घटना के कुछ घंटों के भीतर ही हेल्पलाइन और थाने में सूचना दी, फिर भी पैसा वापस नहीं आ सका। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि पुलिस और कानून व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

सवालों के घेरे में साइबर सेल




जिले की साइबर सेल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। संसाधनों की कमी, सीमित स्टाफ और बढ़ते मामलों का दबाव ये सब कारण बताए जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि साइबर अपराध की रफ्तार के मुकाबले तैयारियां बेहद नाकाफी हैं। चार साल में सवा 25 करोड़ की ठगी के सामने 42 लाख की वापसी कमजोर सिस्टम को बयां कर रही है।



हर साल बढ़ रही साइबर ठगी



जिले में साइबर ठगी के मामलों में वर्ष दर वर्ष तेजी से इजाफा हो रहा है। साइबर पुलिस के जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में जहां 356 साइबर शिकायतें दर्ज हुईं, वहीं ठगों ने 1 करोड़ 32 लाख 54 हजार 332 रुपए की ठगी को अंजाम दिया। इस दौरान 16 लाख 41 हजार 533 रुपए की राशि होल्ड कराई जा सकी। वर्ष 2023 में साइबर शिकायतों की संख्या बढ़कर 473 हो गई और ठगी की रकम भी बढ़कर 4 करोड़ 91 लाख 95 हजार 645 रुपए तक पहुंच गई। इसमें से 68 लाख 76 हजार 441 रुपए होल्ड कराए गए। वर्ष 2024 में हालात और गंभीर हो गए। इस साल 627 शिकायतें दर्ज की गईं और ठगी की राशि 8 करोड़ 50 लाख 43 हजार 964 रुपए रही।





साइबर पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए 94 लाख 51 हजार 382 रुपए होल्ड कराए। वहीं 2025 में अब तक 507 साइबर शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिनमें ठगी की कुल रकम 10 करोड़ 48 लाख 27 हजार 434 रुपए दर्ज की गई है। राहत की बात यह रही कि इस वर्ष 2 करोड़ 18 लाख 56 हजार 827 रुपए की राशि समय रहते होल्ड कराई जा सकी। चार वर्षों में कुल मिलाकर 1964 साइबर शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें ठगों ने 25 करोड़ 23 लाख 21 हजार 370 रुपए की ठगी की, जबकि 3 करोड़ 82 लाख 86 हजार 145 रुपए की राशि होल्ड कराई गई।



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