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‘अनूप’ के नाम आया, ‘करण’ को दिया, अब ताले में केंद्र

कृष्ण चौहान श्रीगंगानगर. सरकारी सिस्टम की ‘नाम न पहचानने की गलती’ ने 55 लाख रुपए का स्वास्थ्य ढांचा कागजों में ही दफना दिया। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत जिस चक 18 एच (अनूपगढ़ क्षेत्र) के लिए सब-सेंटर स्वीकृत हुआ, वहां भवन नहीं बना। इसके बजाय पंचायत समिति करणपुर […]

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कृष्ण चौहान

श्रीगंगानगर. सरकारी सिस्टम की ‘नाम न पहचानने की गलती’ ने 55 लाख रुपए का स्वास्थ्य ढांचा कागजों में ही दफना दिया। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत जिस चक 18 एच (अनूपगढ़ क्षेत्र) के लिए सब-सेंटर स्वीकृत हुआ, वहां भवन नहीं बना। इसके बजाय पंचायत समिति करणपुर के केसरीसिंहपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सात एस कीकरवाली के चक 18 एच लॉटरी में 55 लाख का भवन बना दिया गया। जहां न तो सब-सेंटर स्वीकृत है, न एएनएम का पद और न ही पीएससी पोर्टल पर कोई एंट्री है।

पोर्टल पर इस गांव के नाम से कोई सब-सेंटर दर्ज ही नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक साल तक चले निर्माण कार्य के दौरान तत्कालीन सीएमएचओ, बीसीएमओ और एनएचएम के अधिशासी अभियंता को गड़बड़ी दिखी ही नहीं? गांव का नाम भले एक जैसा हो, लेकिन ग्राम पंचायत,पीएचसी और पंचायत समिति अलग-अलग हैं। इसके बावजूद फाइलें चलीं, भुगतान हुआ और 55 लाख रुपए का भवन तैयार हो गया। गलत जगह निर्माण के कारण तीन साल बाद तक इस भवन का हैंडओवर नहीं हुआ। पीएससी पोर्टल पर इस गांव के नाम से कोई सब-सेंटर दर्ज ही नहीं है।

नुकसान आम जनता का

स्थानीय ग्रामीण इसे महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और संभावित खेल मान रहे हैं। उनका कहना है कि राजनीति और कागजी गफलत के बीच नुकसान आम जनता का हुआ है, जिन्हें आज भी इलाज के लिए दूर जाना पड़ रहा है।

फैक्ट फाइल

  • योजना: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)
  • लागत: 55 लाख रुपए
  • स्वीकृति: गांव 18 एच, तहसील अनूपगढ़
  • निर्माण: गांव 18 एच लॉटरी, पंचायत समिति करणपुर
  • स्थिति: भवन बना, हैंडओवर नहीं
  • कारण: पीएससी पोर्टल पर सब-सेंटर दर्ज नहीं
  • स्टाफ: अनूपगढ़ में एएनएम कार्यरत, करणपुर में पद ही स्वीकृत नहीं
  • परिणाम: करीब 3 साल से उपयोग शून्य

फिलहाल: मामला उच्च स्तर पर भेजा गया

इनका कहना है

कांग्रेस कार्यकाल में करीब तीन साल पहले सब-सेंटर भवन बना, लेकिन शुभारंभ नहीं हुआ। एक साल तक निर्माण चला, तब किसी अधिकारी ने क्यों नहीं देखा? गांव का नाम एक हो सकता है, लेकिन पंचायत और पीएचसी तो अलग है।

लखविंदर सिंह बराड़, नहर अध्यक्ष, 18 एच लॉटरी।

करणपुर क्षेत्र के गांव 18 एच लॉटरी में भवन बना है, लेकिन पीएससी पोर्टल पर इस गांव के नाम से सब-सेंटर की कोई इंट्री नहीं है। इसी कारण भवन का हैंडओवर अब तक नहीं हो पाया।

डॉ. चरणजीत सिंह रोला, बीसीएमओ, करणपुर।सब-सेंटर की स्वीकृति अनूपगढ़ क्षेत्र के 18 एच के लिए हुई थीं, वहां एएनएम का पद भी है। करणपुर क्षेत्र के 18 एच में भवन गलती से बन गया। यह मामला पूर्व अधिकारियों के समय का है। प्रकरण बनाकर उच्च स्तर पर भेजा गया है।
डॉ. अजय कुमार सिंगला, सीएमएचओ, श्रीगंगानगर।