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मौसम बदला, कान पकड़ता बच्चा दे रहा है खतरे का संकेत

- श्रीगंगानगर में दिन में तेज धूप और रात को ठिठुरन से जुकाम के बढ़े रोगी, नाक-गले से फैल रहा संक्रमण, एओएम मामलों में तेज बढ़ोतरी

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श्रीगंगानगर. मौसम में बदलाव के साथ जिले में कान, नाक और गले (ईएनटी) से जुड़ी बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य सर्दी-जुकाम के बाद होने वाला संक्रमण अब बच्चों के कानों तक पहुंच रहा है। यह स्थिति चिकित्सकीय भाषा में एक्यूट ओटाइटिस मीडिया (एओएम) कहलाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और बच्चों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। जिला अस्पताल में ईएनटी ओपीडी अनुभाग की एचओडी डा. रश्मी अग्रवाल का कहना है कि नाक और गले में हुआ संक्रमण ईएनटी मार्ग के जरिए कानों तक फैल जाता है। छोटे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण तेजी से बढ़ता है। इसके चलते कई बच्चों में तेज कान दर्द, बुखार और सुनने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।



दिमाग तक पहुंच सकता है यह संक्रमण



इस दिनों मौसम में परिवर्तन हो रहा है। दिन का तापमान बढ़ने लगा है तो रात को ठिठुरन अधिक रहती है। ऐसे में छोटे बच्चों में कान में तेज दर्द, बार-बार कान पकड़ना या रोना, बुखार, चिड़चिड़ापन, नींद में परेशानी, कान से पानी या मवाद आना, बड़े बच्चों में कान में भारीपन, सुनने की क्षमता में कमी, सिरदर्द या बुखार लगातार होना मुख्य लक्षण है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कुछ मामलों में कान का पर्दा फटने का खतरा रहता है, इससे स्थायी रूप से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति में संक्रमण दिमाग तक भी पहुंच सकता है।



इसलिए बच्चों और बड़ों में अधिक खतरा



विशेषज्ञ चिकित्सकों के मुताबिक 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी की चपेट में अधिक आ रहे हैं। सर्दी-जुकाम के बाद यदि बच्चों में कान दर्द, बेचैनी या सुनने में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है। इसके साथ साथ मौसम और इलाके में प्रदूषण की वजह से भी बड़े भी कान दर्द की चपेट में आने लगे है। जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मोहनलाल छीम्पा ने बताया कि हाल के दिनों में एओएम के मामलों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। संक्रमण की गंभीरता के चलते कई बच्चों को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ा है। बच्चों की सर्दी-जुकाम को हल्के में न लें, दवाइयों का पूरा कोर्स पूरा कराएं और बिना डॉक्टर की सलाह के कान में तेल या किसी भी प्रकार की दवा न डालें।