6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अस्पताल मरीजों से भरा, डॉक्टर्स की कुर्सियां खाली

श्रीगंगानगर.मेडिकल कॉलेज का तमगा मिलने के बावजूद जिला अस्पताल की हालत बदतर है। करोड़ों रुपए के संसाधन, बड़े-बड़े दावे और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के सरकारी दावे जमीन पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। इलाज की आस में मरीज सुबह से कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन ओपीडी कक्ष खाली मिलते हैं। चिकित्सक तय […]

2 min read
Google source verification

श्रीगंगानगर.मेडिकल कॉलेज का तमगा मिलने के बावजूद जिला अस्पताल की हालत बदतर है। करोड़ों रुपए के संसाधन, बड़े-बड़े दावे और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के सरकारी दावे जमीन पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। इलाज की आस में मरीज सुबह से कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन ओपीडी कक्ष खाली मिलते हैं। चिकित्सक तय ड्यूटी समय से देरी से पहुंचते हैं और ड्यूटी समय खत्म होने से पहले ही गायब हो जाते हैं। निगरानी व्यवस्था इतनी ढीली है कि ड्यूटी के दौरान निजी प्रैक्टिस की बात सामने आती है, चाय-ब्रेक और च्राउंड पर हूंज् जैसे बहाने भी चलन में हैं। परिणामस्वरूप मरीज भटकते हैं। यह स्थिति ना केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि इलाज की आस में आ रहे रोगियों की पीड़ा में और इजाफा कर रही है।

अस्पताल का औचक निरीक्षण

सरकार ने जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में क्रमोन्नत कर चिकित्सा व्यवस्था सुधारने के दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक तय ड्यूटी के बावजूद अधिकांश चिकित्सक देरी से पहुंच रहे हैं और दोपहर से पहले ही अस्पताल परिसर से गायब हो रहे हैं। पत्रिका संवाददाता ने दोपहर बाद अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। दोपहर 1.30 बजे के बाद कैंसर, दंत, सर्जरी, मनोरोग और ऑर्थो ओपीडी में अधिकांश वरिष्ठ चिकित्सक अनुपस्थित मिले। केवल मेडिसिन ओपीडी में चिकित्सक अपरान्ह 3 बजे तक मरीजों को देखते पाए गए। मरीजों ने बताया कि सुबह 9 बजे तक कई ओपीडी कक्ष खाली रहते हैं, जिससे बाद में भीड़ और अव्यवस्था हो जाती है। गौरतलब है कि झुंझुनूं कलक्टर ने हाल ही में लेट-लतीफी पर लगाम लगाने के लिए सभी चिकित्सकों की सुबह 9.15 बजे तक उपस्थिति की फोटो उन्हें भेजने के निर्देश दिए हैं। श्रीगंगानगर में भी राजस्थान पत्रिका पहले ही राजमेस चिकित्सकों की उपस्थिति पर सवाल उठा चुकी है।

चाय पीने आया हूं….

निरीक्षण में सामने आया कि कुछ चिकित्सक हाजिरी लगाकर निजी प्रैक्टिस पर चले जाते हैं। अस्पताल समय में संपर्क करने पर च्राउंड पर हैंज् या च्चाय पीने गए हैंज् जैसे जवाब मिलते हैं। अधिकांश ओपीडी कक्षों के बाहर चिकित्सकों की ड्यूटी या अवकाश की जानकारी अंकित नहीं है। कई नर्सिंग कार्मिक भी हाजिरी के बाद नदारद मिले।

समय 2.40 बजे,सर्जरी वार्ड

सर्जरी वार्ड में केवल डॉ. विशाल मौजूद मिले। डॉ. यश रेफर कार्ड बनवाने और डॉ. रवि फीमेल/बर्न वार्ड में बताए गए। विभागाध्यक्ष डॉ. स्वेता सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक अनुपस्थित थे।

समय 2.35 बजे: ऑर्थो व दंत वार्ड

ऑर्थो वार्ड में दोपहर 2.35 बजे केवल डॉ. सुनील भाटीवाल मरीजों के पट्टे की जांच करते पाए गए, जबकि ओपीडी में कोई अन्य चिकित्सक मौजूद नहीं था। वहीं दंत वार्ड में सिर्फ डॉ. आस्था अरोड़ा और डॉ. अनुराग आर्य ही मिले।

वर्जन

सुबह 15-15 मिनट की देरी से आने वाले चिकित्सकों की आधे दिन की छुट्टी काटी जाएगी। वहीं दोपहर बाद ड्यूटी से गायब पाए जाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ पहले नोटिस जारी किया जाएगा और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निदेशक को रिपोर्ट भेजी जाएगी। आदतन लापरवाही बरतने वाले चिकित्साकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ.सुखपाल सिंह बराड़, पीएमओ, राजकीय जिला चिकित्सालय, श्रीगंगानगर