श्रीगंगानगर. केन्द्रीय कारागृह में सजायाफ्ता बंदी एक दिन में करीब आठ हजार रोटियां अपने हाथों से बनाते हैं। जिसमें पांच से आठ बंदी लगते है लेकिन रोटियों का साइज एक ही रहता है। इसके बाद चार बंदी इनको तवे पर सेकनें का कार्य करते हैं। जेल में बंदियों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
पत्रिका ने जब केन्द्रीय कारागृह के अधिकारियों के साथ जेल रसोई देखी तो वहां नजारा ही अलग था। यहां रसोई के बाहर करीब एक दर्जन बंदी उपभोक्ता भण्डार से लाए जाने वाले गेहूं की सफाई करते हैं। गेहूं की सफाई के बाद अंदर लगी चक्की में गेहूं से आटा तैयार किया जाता है।
इस आटे से जेल में सुबह एवं शाम रोटी बनाई जाती है। आटा गूंथने का कार्य मशीन से किया जाता है। रसोई में साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। इस कार्य में केवल सजायाफ्ता उन बंदियों को ही लगाया जाता है, जो खुद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। जिनके नाखून कटे हुए और सिर पर कपड़ा बंधा हो।
यहां करीब 680 बंदियों के लिए एक समय में करीब 4 हजार रोटियां सेंकी जाती है और दो तरह की सब्जियां बनती है। खास बात यह है रोटी बनाने वाली मशीन खराब होने के कारण बंदी हाथों से ही रोटियां बनाते हैं लेकिन इनकी साइज एकदम बराबर रहती है। इसके बाद अन्य बंदी गैस के चूल्हे पर रोटियां सेंकते हैं। रोटियों को एक जगह एकत्रित किया जाता है। इसके बाद बंदियों को भोजन कराया जाता है।
जल्द मिलने वाली रोटी मेकर मशीन
– केन्द्रीय कारागृह को जल्द ही रोटी तैयार करने वाली मशीन जल्द ही आने की उम्मीद है। जयपुर मुख्यालय की ओर से रोटी बनाने की कई मशीनें खरीदी गई है। इन मशीनों का ट्रॉयल चल रहा है। ट्रॉयल पर खरी उतरने के बाद मशीनों को केन्द्रीय कारागृहों में भेजा जाएगा। इसके बाद बंदियों को भी रोटी तैयार करने में समय की बचत होगी।
इनका कहना है
– जेल में साफ-सफाई व स्वच्छता के साथ भोजन तैयार किया जाता है। इसमें सजायाफ्ता बंदियों को ही लगाया जाता है। भोजन बनाने में खुद का स्वच्छ रखने वाले बंदी ही लगाए जाते हैं। जल्द ही जेल को रोटी बनाने की नई मशीन मिलने वाली है।
– अभिषेक शर्मा, जेल अधीक्षक केन्द्रीय कारागृह श्रीगंगानगर