श्रीगंगानगर. ज्वैलरी, आढ़त और रियल इस्टेट के कारोबार से जुड़े एक ही ग्रुप के दस ठिकानों पर आयकर विभाग की टीमों नेतीन दिन यानि करीब 57 घंटे तक सर्च अभियान को पूरा किया। इस ग्रुप के सर्वे कार्यवाही में दस लाख रुपए की नकदी, चालीस लाख रुपए के सोने के जेवर और करीब बीस करोड़ रुपए का हिसाब-किताब मिला है।
आयकर विभाग के प्रधान निदेशक सुधांशु झा ने बताया कि इस कारोबारी ग्रुप की श्रीगंगानगर में दो आढ़त की दुकान, बाजार एरिया में ज्वैलरी शोरूम, सूरतगढ़ रोड और हनुमानगढ़ मार्ग पर अलग-अलग वेयर हाउस और कई कॉलोनियों में भूखंड की खरीद-फरोख्त में किए गए निवेश के संबंध में आयकर सर्वे किया गया। हालांकि सर्वे टीम ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट नहीं दी है। लेकिन अब तक जितनी नकदी, जेवर और हिसाब-किताब मिला है, उसका आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर दस लाख रुपए की नकदी, करीब चालीस लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवर और बीस करोड़ रुपए रियल इस्टेट में निवेश के दस्तावेज मिले हैं।
आयकर विभाग की टीमों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में इस ग्रुप के कारोबारी संस्थानों और घरों पर आयकर विभाग की टीमों ने काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले जब्त किए हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस ग्रुप की जिला मुख्यालय पर िस्थत नई धानमंडी में दो आढ़त की दुकान, सूरतगढ़ रोड और हनुमानगढ़ रोड पर वेयर हाउस, बाजार एरिया में ज्वैलरी शोरूम, दो प्राइवेट कॉलोनी में पार्टनरशिप के अलावा कई प्राइवेट कॉलोनियों में भूखंडों की खरीद फरोख्त से हुई कमाई का आकलन किया गया है।
इधर, संयुक्त् निदेशक दिनेश बड़गुर्जर के अनुसार इस सर्वे के दौरान कारोबारी ग्रुप के अलग-अलग ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन दस्तावेजों में करोड़ों रुपए के लेनदेन का जि₹ हैं, इसकी पुष्टि कराई जा रही है। सर्वे की कार्यवाही के पूरी रिपोर्ट आयकर विभाग के प्रदेश मुख्यालय भिजवाई गई है, वहां से ही सर्वे के दौरान अघोषित आय की जानकारी उपलब्ध करवाई जा सकेगी।
इधर, आयकर विभाग के प्रधान निदेशक सुंधाशु झा, आयकर विभाग के संयुक्त निदेशक करणीदान सिंह, संयुक्त निदेशक अशोक चारण और दिनेश बड़गुर्जर की देखरेख में आयकर विभाग के साठ अधिकारी और कार्मिक शामिल थे। वहीं सुरक्षा की दृष्टिगत 25 से 30 पुलिस कर्मियों का जाब्ता मंगवाया गया था। इस ग्रुप के एक साथ दस ठिकानों पर दबिश दी गई। इससे इलाके में ज्वैलरी, रियल इस्टेट और धानमंडी के आढतियों में खलबली मची रही। इस कारोबारी ग्रुप के कई रिश्तेदार श्रीगंगानगर और पंजाब में रहते हैं, ऐसे में उनके यहां सर्वे टीम आने का अंदेशा बना रहा। जांच दल ने सर्वे की कार्यवाही को इस ग्रुप के दस ठिकानों तक ही सीमित रखा।