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पॉलीहाउस में खीरे की खेती ने बनाया ‘लखटकिया’

-पत्रिका एक्सक्लूसिव--कृष्ण चौहान- रायसिंहनगर तहसील के गांव पांच केएसडी बी का राधेश्याम रत्तीवाल बनना चाहता था सीए, बन गया सफल किसान

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पॉलीहाउस में खीरे की खेती ने बनाया ‘लखटकिया’

पॉलीहाउस में खीरे की खेती ने बनाया ‘लखटकिया’

पॉलीहाउस में खीरे की खेती ने बनाया ‘लखटकिया’

- रायसिंहनगर तहसील के गांव पांच केएसडी बी का राधेश्याम रत्तीवाल बनना चाहता था सीए, बन गया सफल किसान
श्रीगंगानगर. रायसिंहनगर तहसील क्षेत्र के चक पांच केएसडी बी निवासी युवा राधेश्याम रत्तीवाल बी.कॉम के बाद सीए बनना चाहता था। हालात ने साथ नहीं दिया। लिहाजा सीए नहीं बन पाया लेकिन हाईटेक खेती कर खीरे का सफल किसान बन गया। इसके लिए खेत में चार हजार वर्ग फीट में पॉलीहाउस लगाया। इसमें खीरा की हाईटेक खेती शुरू की। अब वह सालाना 20 लाख रुपए कमा रहा है। रत्तीवाल ने बताया कि वह खुद खेती करता है। सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम लगा रखा है। उद्यान विभाग से राजस्थान संरक्षित खेती मिशन के तहत वर्ष 2022-23 में उसने अपने खेत में चार हजार वर्ग फीट पर पॉली हाउस लगाया। इस पर 42 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आया। उसे 23 लाख 63 हजार रुपए का अनुदान मिल चुका है। वहीं, 18 लाख 61 हजार रुपए खुद वहन करने पड़े। यह लागत उसने एक साल में ही कवर कर ली।
-----------खेत में बनाई डिग्गी और लगाया सोलर पंप
रत्तीवाल ने बताया कि आइजीएनपी की सूरतगढ़ ब्रांच (नहर) से खेत में सिंचाई पानी लगता है। नहरबंदी और टेल पर होने की वजह से सिंचाई पानी की कमी बनी रहती है। टयूबवैल का पानी अनुकूल नहीं है। इस कारण खेत में डिग्गी बनाई और सोलर पंप सेट लगाकर ड्रिप सिस्टम अपनाया।
---------------एआरएस पर भ्रमण कर खेती की प्रक्रिया जानी
रत्तीवाला का कहना है कि पॉलीहाउस लगाने से पहले उद्यान विभाग ने कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर का भ्रमण करवाया था। एआरएस के कृषि वैज्ञानिक बीएस मीणा ने पॉली हाउस से संबंधित हाइटेक खेती की नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
-----------------------फसल के अनुकूल रहता है तापमान
उद्यान विभाग के अनुसार पॉली हाउस में नई तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल एवं बेमौसम की हाईटेक खेती की जा रही है। तापमान नियंत्रण आद्र्रता के साथ-साथ कार्बनडाइ ऑक्साइड, मृदा, तापमान, पादक-पोषक तत्व आदि सही रहते हैं। साथ ही कीटों और रोगों के नियंत्रण में मदद मिलती है।
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एक पॉलीहाउस पर खर्चा व अनुदान
क्षेत्रफल-4000 वर्ग मीटरकुल लागत-42,24,400 रुपए
अनुदान : 23,63,200 रुपए
कृषक हिस्सा राशि - 18,61,200 रुपए---------------
ये सुविधाएं मिल रही
उद्यान विभाग की उप-निदेशक उद्यान प्रीति बाला ने बताया कि राजस्थान संरक्षित खेती मिशन के तहत पॉलीहाउस लगाया जा रहा है। इसमें सामान्य किसान को 50 प्रतिशत, एससी-एसटी को 70 और लघु व सीमांत किसान को 95 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। पॉलीहाउस स्थापित करने वाली कंपनी तीन साल के लिए बीमा भी करती है।
फैक्ट फाइल-एक साल के दो सीजन में खीरा का उत्पादन लिया जा रहा। दोनों सीजन सात माह तक रहते हैं।
-पॉलीहाउस से प्रतिदिन 12 से 13 क्विंटल खीरा उत्पादन। -एक वर्ष में खाद, बीज, सिंचाई पानी, लैबर आदि का खर्च निकाल कर शुद्ध 20 लाख रुपए का लाभ
--------------श्रीगंगानगर-अनूपगढ़ जिले में दो दर्जन से अधिक किसान पॉली हाउस स्थापित कर किसान हाईटेक खेती कर रहे हैं। पॉली हाउस में किसानों को अच्छा अनुदान मिल रहा है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद नैण, कृषि अधिकारी उद्यान, श्रीगंगानगर।

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