World Bicycle Day 2023 : श्रीगंगानगर. एक जमाना था जब साइकिल आवाजाही का साधन था, लेकिन बदलते परिवेश में साइकिल केवल एक वाहन भर नहीं है बल्कि इसे चलाने के सेहत से जुड़े भी कई फायदे हैं। साइकिल चलाना एक तरह की एरोबिक एक्सरसाइज है। इसको शरीर को चुस्त रखने के लिए, पतले होने के लिए और मसल्स को टोन करने के लिए भी चलाया जा सकता है। इसके साथ-साथ मूड अच्छा होने में भी मदद मिलती है। चिकित्सकों की माने तो अगर रोजाना पर्याप्त समय के लिए साइकिल चलाई जाए तो शरीर फिट और फाइन नजर आता है। सप्ताह में तीन दिन भी आधे से एक घंटे के बीच साइकिलिंग भी घुटनों जैसे दर्द से छुटकारा दिला सकता है। कोरोनकाल में स्वास्थ्य के प्रति लोग जागरूक अधिक हुए तो इलाके में साइकिलिंग का ऐसा माहौल बना कि बड़े-बड़े चिकित्सक, व्यापारी और अधिकारी भी साइकिलिंग करने लगे। साइकिलिंग करने वाले कई लोग हैं।
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इन चुनिंदा लोगों ने पत्रिका को अनुभव के बारे में बताया। विदित रहे कि हर साल तीन जून के दिन विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस मनाने के पीछे पर्यावरण के लिए साइकिल के फायदे उजागर करना और सेहत के लिए साइकिल चलाने के फायदों से लोगों को अवगत कराना है। वर्ष 2018 से यह दिवस मनाने का दौर शुरू किया गया था। साइकिल ऐसा वाहन है जो वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे चलाने के लिए पेट्रोल या सीएनजी जैसे किसी इंधन की जरूरत नहीं पड़ती है। वहीं, सेहत पर भी साइकिल चलाने के कई फायदे साफ देखे जा सकते हैं।
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इंदिरा चौक के पास वार्ड 64 धानक मोहल्ला निवासी नगर परिषद के कार्यालय अधीक्षक से सेवानिवृत्त महावीरसिंह ढिल्लोड़ की आयु करीब 70 साल की हो चुकी है, लेकिन अपनी साइकिल को सरपट दौड़ाते हैं। ढिल्लोड़ का कहना है कि बचपन में आवाजाही का साधन साइकिल था। तब से लेकर अब तक साइकिल दिनचर्चा का हिस्सा बन गई। वर्ष 2014 तक नगर परिषद के सेवाकाल में साइकिल से ही शहर का भ्रमण किया जाता था। अब खुद के लिए घूमता हूं। सस्ता और सरल इस साधन से सफर करना आरामदायक भी है और सुकून भरा भी। चिकित्सक भी इससे अधिक फायदे बताते हैं।
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विनोबा बस्ती निवासी द्धारका प्रसाद सारस्वत की आयु 80 साल हो चुकी है। एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद वकालत की बजाय व्यापार करने लगे। इस व्यापारी ने अपने बचपन से गांव में और इसके बाद अपनी कर्मभूमि श्रीगंगानगर में आने के बावजूद साइकिल से नाता नहीं तोड़ा। किसी भी कार्यक्रम में जाना हो तो साइकिल पर सवार होकर पहुंचते हैं। उम्र के इस पड़ाव के बावजूद साइकिलिंग अपनी आदत में शुमार हो गई है। सारस्वत का कहना है कि इससे शरीर भी फिट रहता है और गंतव्य स्थल पर पहुंचना भी सुरक्षित रहता है।
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राजकीय जिला चिकित्सालय में उपनियंत्रक पद पर चिकित्सक डा. राजकुमार बाजिया हर रविवारीय अवकाश पर सुबह पांच बजे से सुबह आठ बजे तक करीब पचास किमी का सफर साइकिलिंग से करते हैं।कोरोनाकाल में सेहत को फिट रखने का जुनून सवार हुआ तो साइकिलिंग करने लगे। यह धीरे-धीरे अब आदत में शुमार हो गई। पहले रोजाना दस से बीस किमी का सफर करते, सप्ताह में करीब पांच दिन साइकिलिंग करते। अब हर संडे को यह लक्ष्य बना लिया है। पचास किमी तक साइकिलिंग करने से सुखद अनुभूति होती है। यह शारीरिक रूप से दुरूस्त है ही, इसके साथ-साथ मानसिक रूप से भी फिट करने में भी मदद करती है। डा. बाजिया के अनुसार शरीर का वजन पहले 85 किलोग्राम था, अब यह घटकर 63 किलोग्राम तक रह गया है। शरीर में मोटापा किसी को है तो वह साइकिलिंग से अपना शरीर कंट्रोल कर सकते हैं।
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हाउसिंग बोर्ड जवाहरनगर निवासी जिला उप शिक्षा अधिकारी शारीरिक शिक्षा के पद से सेवानिवृत्त सूरजाराम सिहाग की आयु 75 पार हो चुकी है। अपनी सेवानिवृत्ति के पन्द्रह साल पूरे होने के बावजूद अभी तक साइकिलिंग करना नहीं छोड़ा है। इन सीनियर सिटीजन का कहना है कि करीब 66 साल से लगातार वे साइकिल चला रहे हैं। घर में बच्चों के पास कार और बाइक भी है, लेकिन उन्होंने अपनी साइकिल का साथ नहीं छोड़ा। यहां तक कि सेवाकाल में लोकल में स्कूलों की चैकिंग के दौरान भी वे साइकिल पर सवार होकर जाते थे। सिहाग का कहना है कि स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई के दौरान भी साइकिल का इस्तेमाल किया गया था। अब भी बाजार में खरीदारी करना हो या लोकल में कोई प्रोग्राम हो तो वे साइकिल से सरपट दौड़कर जाते हैं। साइकिलिंग जीवन में आदत सी बन गई है।