
SriGanganagar दीया तले अंधेरा: सीएमएचओ ऑफिस कैम्पस में पसरी गंदगी
श्रीगंगानगर। इस बार इलाके में जमकर हुई बरसात का अब दुष्परिणाम के रूप में मलेरिया-डेगूं का प्रकोप बढ़ा है। डेगूं की चपेट में आ चुके इलाके में जिस प्रभावी ढंग से प्रयास किए जाने थे उसकी बजाय सरकारी स्तर पर कागजों में ही जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सीएमएचओ की ओर से दूसरे सरकारी विभागों को ‘हमारा स्वास्थ्य-हमारी जिम्मेदारी’ अभियान से जागरूकता का संदेश देने की कोशिश की गई है लेकिन सीएमएचओ ऑफिस कैम्पस में गंदगी का आलम है। बरसाती सीजन समाप्त होने के दो महीने उपरांत भी वहां पनपी घास को साफ करने के लिए प्रयास तक नहीं हुए। वहीं इसी परिसर में संचालित हो रही अर्बन डिस्पेंसरी के पास बायोवेस्ट खुले में फेंका हुआ है। नियमानुसार इस बायोवेस्ट का निस्तारण के लिए खुला में फेंकने पर प्रतिबंध है, इसके बावजूद कचरे के ढेर में ऐसा बायोवेस्ट पड़ा हुआ है। पत्रिका टीम ने शनिवार को जब जायजा लिया तो सीएमएचओ ऑफिस की सेहत खराब नजर आई।
चिकित्सा एव्ं स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकार किया है कि अक्टूबर माह में डेंगू-मलेरिया के अधिक मामले सामने आते रहे हैं। मच्छरों के ट्रांसमिशन श्रंखला को तोड़ने के लिए मच्छर रोधी गतिविधियां कराने के निर्देश दिए।
इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से हमारा स्वास्थ्य, हमारी जिम्मेदारी’ अभियान की गाइडलाइन में कई तरह की गतिविधियां संचालित करानी थी। इस अभियान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ नगर परिषद से नालियों की सफाई, जल निकासी, सड़क के गड्ढों को भराना, घरों पर टंकी की जांच व मच्छर का लार्वा मिलने पर चालान बनाने की कार्रवाई करना शामिल किया गया। वहीं पशु पालन की ओर से स्क्रब टायफस नियंत्रण की गतिविधियां, आयुर्वेद की ओर से सर्वे और सुपरविजन में सहयोग, पंचायतीराज विभाग की ओर से डीडीटी छिड़काव के लिए सहयोग, समाज कल्याण विभाग खुद के स्कूल, छात्रावासों आदि में एंटी लार्वा गतिविधियां करना, शिक्षा विभाग का स्कूलों में बच्चों को जागरूक करना था। 21 अक्टूबर तक संचालित होने वाले इस अभियान में 13 विभागों को जिम्मेदारी भी तय की गई।
इस बीच, सीएमएचओ ऑफिस परिसर में दो भवन है, एक नया तो दूसरा पुराना। पुराने भवन में पहले राजकीय जिला चिकित्सालय संचालित होता था, यह चिकित्सालय शिफ़ट होने के बाद कई कमरे सीएमएचओ ऑफिस की विभिन्न् शाखाओं के लिए खोल दिए गए है, जो अब भी वहां संचालित हो रहे है। तीन साल पहले इसी कैम्पस में नया भवन बना तो वहां सीएमएचओ, डिप्टी सीएमएचओ खुद बैठने लगे। दोनेां भवनों में पुराने वाहन कबाड़ के रूप में खड़े है।
वहीं खाद्य पदार्थो की जांच के लिए प्रयोगशाला बंद होने के बाद वहां भवन भी बंद पड़ा है। पूरे कैम्पस की सार-संभाल नहीं होने के कारण कचरे के ढेर लगे हुए है। वहीं कई इंटरलोकिंग टाइल्स बरसात में धंस चुकी है, उसे भी दुरुस्त नहीं कराया गया है। इस ऑफिस में काम करने वाले कार्मिको का कहना है कि यहां सफाई पूरे साल में कभी कभार होती है।
Updated on:
15 Oct 2022 08:16 pm
Published on:
15 Oct 2022 08:14 pm
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