
श्रीगंगानगर. कृषि क्षेत्र में अग्रणी श्रीगंगानगर जिले में वन्य जीवों की संख्या घट रही है। संरक्षित वन्य जीव काला हिरण और राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या में भारी गिरावट आई है। उप वन संरक्षक श्रीगंगानगर के अधीन आठ रेंज में पिछले दिनों बुद्ध पूर्णिमा की रात हुई वन्य जीव गणना में सांडा ही एकमात्र ऐसा जीव है, जिसकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वन्य जीव गणना में यह बात सामने आई कि सिंचित होने से इस इलाके की भौगोलिक स्थिति में आए बदलाव के कारण कई वन्य जीवों का अस्तित्व अब नहीं रहा है। वन्य जीवों की गणना वाटर होल्स के पास मिलने वाले पग मार्क के आधार पर होती है। इस बार आठ रेंज में 59 वाटर होल्स पर वन्य जीवों की गणना हुई। गणना कार्य 105 वन कर्मियों ने किया। इस कार्य में वन्य जीव प्रेमियों और वन्य जीव संरक्षण की दिशा में काम कर रही समितियों का भी सहयोग रहा।
वन्य जीव गणना के दौरान जिले की आठों रेंज में बाघ, बघेरा, जरख, मछुआरा बिल्ली, बिल्ली, भेड़िया, भालू, बिज्जू छोटा, बिज्जू बड़ा, कवर बिज्जू, सियागोश, पेगोलिन, चीतल, सांभर, चौसिंगा, उड़न गिलहरी, लंगूर, गोडावण, सारस, जंगली मुर्गा, इंडियन लॉग बिल्ड वल्चर, व्हाइट बैक्ड वल्चर, रेड हेडेड वल्चर, घड़ियाल और मगर का अस्तित्व नहीं मिला। इनमें से कई वन्य जीव तो इलाके में थे ही नहीं और कई भौगोलिक स्थिति में आए बदलाव के कारण पलायन कर अन्यत्र चले गए।
वन्य जीव गणना 2022-23 से तुलना करें तो सियार, जंगली बिल्ली, मरु बिल्ली, लोमड़ी, काला हिरण, रोजड़ा, चिंकारा, मोर, सांडा, खरगोश और तीतर की संख्या कम मिली है। सेही, पाटा गोह, नेवला और सफेद गिद्ध की उपिस्थति वन्य जीव गणना में दर्ज हुई है।
श्रीगंगानगर के उपवन संरक्षक दलीप सिंह राठौड़ का कहना है कि पिछली वन्य जीव गणना से इस बार किन्हीं वन्य जीवों की संख्या कम है तो इसे वन्य जीवों की संख्या में कमी नहीं कहा जा सकता। दरअसल, वन्य जीवों की गणना वाटर होल्स के आसपास उनके पग मार्क पर आधारित होती है। कई बार किसी विशेष इलाके में वाटर होल्स की संख्या कम होने पर कम पग मार्क मिलते हैं। गणना के समय वन्य जीव वाटर होल्स पर पानी पीने के लिए नहीं आए तो भी पग मार्क कम मिलते हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जिले में वन्य जीवों की संख्या संतोषजनक है।
Published on:
01 Jun 2024 04:19 pm
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