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श्रीगंगानगर खंड में गेहूं की बुवाई में कमी, जौ में दिलचस्पी बढ़ी

-सिंचाई पानी की कमी से प्रभावित हुई गेहूं की बुवाई

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  • श्रीगंगानगर.आईजीएनपी, भाखड़ा और गंगनहर परियोजनाओं से रबी फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में सिंचाई पानी नहीं मिलने के कारण इस बार श्रीगंगानगर खंड में गेहूं की बुवाई लक्ष्य की तुलना में कम हुई है जबकि जौ की फसल के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। इस वर्ष श्रीगंगानगर खंड में गेहूं की बुवाई का लक्ष्य 5 लाख 25 हजार हेक्टेयर था लेकिन 4 लाख 22 हजार 776 हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है, जो कि 80.33 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में भी 15,544 हेक्टेयर गेहूं की बुवाई कम हुई है। किसानों ने इस गेहूं की बजाय इस बार जौ की बुवाई में दिलचस्पी दिखाई है। कृषि विभाग के अनुसार श्रीगंगानगर खंड में 1,38,284 हेक्टेयर में जौ की बुवाई की गई,जो कि लक्ष्य का 113.35 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 11,973 हेक्टेयर अधिक जौ की बुवाई हुई है। उल्लेखनीय है कि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में राज्य भर में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन होता है। साथ ही गेहूं की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।

कहां कितनी हुई बुवाई

  • कृषि विभाग के अनुसार श्रीगंगानगर जिले में 1,23,535 हेक्टेयर, अनूपगढ़ में 93,021 हेक्टेयर और हनुमानगढ़ में 2,06,220 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुवाई हुई। पिछले वर्ष के आंकड़ों की तुलना करें तो श्रीगंगानगर व अनूपगढ़ जिले में 2,21,120 हेक्टेयर और हनुमानगढ़ में 2,17,200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई की गई थी। ऐसे में इस बार गेहूं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।

जौ की बुवाई सिंचाई पानी की कमी से बढ़ी

  • सेवानिवृत उप-निदेशक (कृषि), श्रीगंगानगर डॉ.मिलिंद सिंह का कहना है कि किसानों ने कम सिंचाई पानी के कारण बुवाई की योजना में बदलाव किया है और जौ को प्राथमिकता दी है। जौ की फसल कम पानी की मांग के कारण फायदेमंद है।

इनका कहना है

  • श्रीगंगानगर खंड में इस बार गेहूं की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम हुई है जबकि इस बार जौ की बुवाई 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पिछले साल की तुलना में अधिक हुई है।
  • -डॉ.सतीश कुमार शर्मा,अतिरिक्त निदेशक (कृषि),श्रीगंगानगर।