
खुद ही अपडेट नहीं, दीवारों पर नाम-नंबर लिखवाकर भूले
महेंद्र सिंह शेखावत
श्रीगंगानगर. आमजन में अक्सर एक जुमला चलता है कि पुलिस घटनास्थल पर कभी समय पर नहीं पहुंचती। दरअसल, इस जुमले की पीछे कहीं न कहीं पुलिस की लेटलतीफी भी छिपी होती है, भले ही कारण कोई भी हो। जनता से बेहतर संबंध, सपंर्क संवाद बनाने के लिए काफी समय पर पहले बीट कांस्टेबल व थाना प्रभारियों के नाम संबंधित थाना क्षेत्र में दीवारों पर लिखे गए थे। हैरानी की बात यह है कि लंबा समय बीतने के बावजूद यह नाम व नंबर अपडेट नहीं किए गए।
इससे भी बड़ी बात तो यह है कि किसी अधिकारी का थाना बदल गया, किसी का जिला तो किसी की रेंज। पुराने नाम एवं फोन नंबर के कारण आमजन एवं फरियादी भ्रमित होते हैं। इसके अलावा पुलिस को भी समय पर जानकारी नहीं मिल पाती। भूलवश लोग दीवार पर लिखे नंबर पर फोन लगाते हैं तो उनको निराशा ही हाथ लगती है। इस कारण जनता-पुलिस के बीच संवाद स्थापित नहीं हो पाता।
विदित रहे कि आमजन तक पुलिस की पहुंच आसान बनाने तथा सूचनाओं के तत्काल आदान-प्रदान के लिए बीट प्रणाली लागू की गई है। इसी के तहत बीट कांस्टेबल और बीट अधिकारी के नाम और उनके मोबाइल नम्बर शहर के प्रमुख चौराहों और गली-मोहल्ले की दीवारों पर लिखे गए थे। इसके अलावा थाने के फोन नम्बर और थानाप्रभारियों के नम्बर भी अंकित किए गए।
खुफिया तंत्र सही नहीं, इसीलिए बढ़ रहे अपराध
शहर में कानून व्यवस्था पर गाहे-बगाहे सवाल उठते रहते हैं। चोरी, छीनाझपट्टी के घटनाएं तो आम हो चुकी हैं। इसके अलावा फोन पर धमकाने एवं फिरौती मांगने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इन सब घटनाक्रमों के पीछे पुलिस का खुफिया तंत्र फेल होना माना जा रहा है।
गलत नंबरों के कारण पुलिस को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती और जब तक पुलिस के पास सूचना आती है तक तक देर हो चुकी होती है। तंत्र दुरुस्त नहीं होने के कारण बीट अधिकारी अपने क्षेत्र में पकड़ नहीं बना पा रहे। इसी कारण अपराधिक गतिविधियों का ग्राफ बढ़ रहा है।
सीयूजी नम्बर भी बदले
पुलिस प्रशासन ने पहले एक साथ पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को सीयूजी नम्बर 95 सीरिज के शुरू किए थे। ये नम्बर अधिकांश बदल गए हैं। थाना प्रभारियों के सीयूजी नम्बर 87 नम्बर की सीरिज से शुरू हो चुके हैं। लेकिन अधिकांश दीवारों पर पुराने नंबर लिखे हैं।
वैसे वर्तमान में जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष के वाट्सअप नम्बर 95304-34094 के साथ साथ टेलीफोन नम्बर 0154-2443055 और 2443100 पर शिकायत या सूचना दी जा सकती है।
आमजन की पुलिस की पहुंच आसान बनाने तथा सूचनाओं के तत्काल आदान-प्रदान के लिए बीट प्रणाली लागू की गई। इसके तहत दीवारों पर थाना प्रभारी एवं बीट कांस्टेबल आदि के फोन नंबर लिखे गए थे। लंबा समय बीतने के बावजूद नाम एवं नंबर अपडेट नहीं हुए हैं।
इनका कहना है
थाना इलाके में बीट व थाने से संबंधित के नंबर लिखवाने के स्टैडिंग आदेश हैं। ये कब लिखे गए, इसकी जानकारी नही रहती। अब नए साल मे नए सिरे से बीट से संबंधित सूचना व नाम आदि लिखवाने का अभियान शुरू किया जाएगा।
- आनंद शर्मा, पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर
Published on:
03 Jan 2023 04:14 pm
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