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शिक्षा विभाग का बदलेगा अब समूचा स्टाफ

change staff अंगद के पांव की तरह जमे शिक्षकों व कार्मिकों को अब हटाने की प्रक्रिया

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Education department

शिक्षा विभाग का बदलेगा अब समूचा स्टाफ

श्रीगंगानगर (Sri Ganganagar)अंगद के पांव की तरह शिक्षा विभाग (Education department) में प्रतिनियुक्तियों की आड़ में शिक्षकों और शिक्षा कार्मिकों को अब हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सीबीइओ ऑफिस में पीटीआई ओमप्रकाश शर्मा भी पिछले सात सालों से प्रतिनियुक्ति की आड़ में जमा हुआ था, जब इस ऑफिस में पे मैनेजर से मौजूदा और सेवानिवृत्त शिक्षकों व शिक्षा कार्मिकों के पासवर्ड हासिल कर करीब 35 करोड़ रुपए का घोटाले को अंजाम दिया।

अब शिक्षा विभाग के आला अफसरों ने आनन फानन में प्रतिनियुक्तियों पर रहने वाले शिक्षकों और कार्मिकों को वापस स्कूलों में काम करने की प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। शिक्षा निदेशालय बीकानेर की संयुक्त निदेशक देवलता चांदवानी ने बतायाकि इस कार्यालय के समूचे स्टाफ को बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उन्होंने स्वीकारा कि सीबीइओ के पदों पर वर्तमान और तत्कालीन अधिकारियों ने इन प्रतिनियुक्तियों में चल रहे शिक्षकों व कार्मिकों को स्कूलो में भेजने की बजाय ऑफिस में ही जमे रहने की छूट दे दी। वहीं कई शिक्षक और कार्मिक जिला कलक्ट्रेट,जिला परिषद, पंचायत समिति, उपखण्ड कार्यालय आदि सरकारी कार्यालयों में चुनाव कार्य या परिसीमन कार्य की आड़ में प्रतिनियुक्तियां लेकर जम जाते है।

लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार के पुराने आदेश का हवाला देते हुए बताया कि प्रतिनियुक्तियां पर चल रहे शिक्षकों व कार्मिकेां की सूची तैयार कर निदेशक के पास भिजवाई जा चुकी है। विभागीय जांच की प्रक्रिया पूरी होने ही पूरे स्टाफ को बदला जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी प्रारभिंक मुख्यालय में यूडीसी अनिल स्वामी, सीबीइओ कार्यालय के बाबू सीताराम सहित कई बाबू ऐसे है जिनका प्रमोशन होकर अन्यत्र जगहों पर तबादला किया गया था। यूडीसी स्वामी का तबादला कराने के लिए तीन साल पहले तत्कालीन श्रम मंत्री सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी ने डिजायर से इस बाबू को अन्यत्र जगह लगाने की डिजायर शिक्षा मंंत्री से की थी लेकिन इस बड़े बाबू ने आला अफसरों से अपने तबादले की प्रक्रिया रूकवा ली।

वहीं सीबीइओ ऑफिस के बाबू सीताराम को पदोन्नत कर दूसरे जिले में स्थानान्तरण किया गया था लेकिन उसने यह पदोन्नति नहीं ली। विभागीय अधिकारियों की माने तो कईयों ने कोर्ट से स्टे आर्डर ले लिया लेकिन एक साल के उपरांत स्टे को खारिज कराने के लिए शिक्षा विभाग ने लोक अभियोजक या महाअधिवक्ता को रिपोर्ट तक नहीं भिजवाई।

ऐसे में स्टे अवधि समाप्त होने के उपरांत भी इन कार्यालयों में जमे रहे। इधर, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक में भी कई लिपिकों के तबादले हुए लेकिन वे अब तक स्थानान्तरित स्थान पर पहुंचे तक नहीं है। दो सप्ताह बाद भी एक बाबू स्टे ऑर्डर लाने के चक्कर में इस ऑफिस से रिलीव तक नहीं हुआ है।

यही हाल जिला परिषद का है, यहां शिक्षक प्रदीप कामरा लंबे समय से ऑफिस में डयूटी बजा रहा है, इसके खिलाफ जिला परिषद की साधारण सभा में भी मामला उठ चुका है लेकिन जिला परिषद प्रशासन ने उसे रिलीव नहीं किया है।