
अब निगाहें गौड़, बिहाणी, चांडक, टाक, आहुजा, जिन्दल और बाऊजी के खेल पर टिकी
श्रीगंगानगर विधानसभा का चुनाव अब क्रिकेट के टी-टवेंटी मैच की तरह रोमांचक दौर पर पहुंच गया है। इस चुनाव से पहले यह दावा किया जा रहा था कि प्रमुख दलों के अधिकृत प्रत्याशियों में मुख्य मुकाबला होगा। लेकिन टिकट वितरण के बाद मचे घमासान और चुनाव मैदान में अनुभवी बागियों ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए है। यहां तक कि कांग्रेस और भाजपा को अपने वजूद की लड़ाई लडऩे के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और रिश्तेदारों से यहां के मतदाताओं के बदले मूड को दुरुस्त कराने के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे है। हालांकि ग्यारह दिसम्बर को परिणाम घोषित के बाद ही हकीकत सामने आएगी कि चुनाव की इस गुगली पिच पर कौनसा बैट्समैन कितना टिका और कितने रन वोटों के रूप में लिए। इस चुनाव में कांग्रेस ने जहां अशोक चांडक को टिकट दी है। वहीं भाजपा ने नए चेहरे विनीता आहुजा को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस से बगावत कर चुनाव मैदान में जयदीप बिहाणी और राजकुमार गौड़ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना भाग्य अजमा रहे है। इन दोनों ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए है। वहीं भाजपा से बगावत करने वाले पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर और भाजपा से टिकट नहीं मिलने से खफा होकर बसपा का दामन पकडऩे वाले प्रहलाद टाक ने प्रत्याशी बनकर अब तक के विश्षेलकों का गणित बिगाड़ दिए है। इसी चुनाव मैदान में मौजूदा विधायक कामिनी जिन्दल ने फिर से जमींदारा पार्टी की उम्मीदवार के रूप में अपना प्रचार तेज कर दिया है। किसे वोट दे या किसे नहीं, यह उलझन अब उम्मीदवारों ने मतदाताओं पर केबीसी की तरह सवाल छोड़ दिया है।
किस प्रत्याशी में क्या है खास है, यह सवाल अब उठने लगे है। इस संबंध में लोगों ने अपने अपने हिसाब से सर्वे तक करना शुरू कर दिया है। बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष और कांग्रस के लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे जयदीप बिहाणी को नगर सेठ के रूप में जाना जाता है, ऐसे कई अभिभावक है जिनके बच्चों की फीस आधी या पूरी माफ करने के लिए बिहाणी ने कभी इंकार नहीं किया है। इस संबंध में बिहाणी ने कभी भी अपने अहसानों को कैश नहीं करवाया है। इसी तरह निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार गौड़ के पिछले बीस सालों से फील्ड में हर सुख दुख में पहुंचने की सेवा का असर अब चुनाव में दिखने लगा है। गौड़ ने भी कभी किसी के साथ दुव्यर्वहार या विवाद नहीं किया है। साफ छवि के कारण उनको भी मतदाता पसंद कर सकते है। उधर, मौजूदा विधायक कामिनी जिन्दल ने ग्रामीण इलाके में विकास कराने के लिए बिना किसी एप्रोच के बजट उपलब्ध कराने से वोट बैंक बना हुआ है। इधर, पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर भले ही वयोवृद्ध हो चुके है लेकिन अपनी कार्यशैली से एक सूत्र में बांधने का मादा रखते है। इस कारण पूर्व मंत्री भी उलटफेर करने में माहिर है। वर्ष 1993 के चुनाव में तत्कालीन सीएम भैंरोसिंह शेखावत को हराकर पूर्व मंत्री राधेश्याम यह करिश्मा कर चुके है। इस बीच बसपा प्रत्याशी प्रहलाद टाक ने भी पिछले पांच सालो से भाजपा कार्यकर्ता के रूप में अनेको कार्यक्रम आयोजित किए थे, इस कारण उनके हर वार्ड में लोग मित्रता का संबंध रखते है। इस चुनाव में टाक की छवि भी बेदाग के रूप में निखरी है। उनको भी लोग मौका दे सकते है। वहीं कांग्रेस के नए चेहरे बड़े व्यवसायी अशोक चांडक ने सारे समीकरण बदल दिए है। यह चुनाव चांडक बनाम अन्य प्रत्याशी के रूप में हो गया है। चांडक खुद जुबान के धनी है, यह छवि भी इस चुनाव में उनका सबसे बड़ा हथियार है। चार साल पहले जब उन्होनें अपने अनुज अजय चांडक को नगर परिषद का सभापति बनवाया था, तब अशोक चांडक ने किंगमेकर की भूमिका निभाते हुए शहर के पचास में से 48 पार्षदों को अपने अनुज अजय चांउक के झोली में डाल दिए थे।
Published on:
24 Nov 2018 11:22 pm
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