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Kisan Aandolan : मिर्च और टमाटर की खेती भी किसानों को संकट से नहीं उबार पाई

पर्याप्त भाव के अभाव में यह खेती भी संकट में दिखाई दे रही है
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श्री गंगानगर

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Sonakshi Jain

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Updated: 5 Jun 2018, 12:06 PM IST

farmer demonstration against government forth day

mp patwari 2018 latest news

बीरमाना ( श्रीगंगानगर) क्षेत्र के कुछ किसानों ने रबी-खरीफ़ की पारम्परिक फसलों से हटकर बड़े स्तर पर मिर्च, टमाटर, बैंगन और लौकी की खेती की पर बदनसीबी बदस्तूर जारी है। क्षेत्र में टमाटर और मिर्च का 7 से 8 मुरब्बा का बिजान हुआ था। फसलों की कामयाब पौध देखकर किसान अच्छी पैदावार के लिए आशान्वित थे। दोनों फसलों की पैदावार अच्छी हुई पर भाव इस कदर गिर गए की आवागमन का खर्च भी पूरा नही हो पाता है।

मिर्च का भाव 3 रुपये और टमाटर का भाव 5 रुपये किलो के हिसाब से लग रहा है जबकि मिर्च और टमाटर की तुड़वाई ही डेढ़ रुपये किलो है। किसान लोग मिलकर एक कैंपर में मिर्च-टमाटर 40 किलोमीटर दूर बिजयनगर या सूरतगढ़ मंडी ले कर जाते हैं। मंडी सुबह 5 बजे पहुंचना होता है इसलिए सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट भी उप्लब्ध नहीं हो पाता है।

गांव बंद के चलते मिर्च टमाटर हो रहे खराब

वर्तमान में पिछलें दिनो से चले आ रहे किसान आन्दोलन के कारण क्षेत्र के किसानो द्वारा बोये टमाटर व मिर्च खराब हो रही है क्योकि बंद के चलते सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों के हर रोज चपत लग रही। मिर्च खड़े पौधौं के ही सूख रही है। वही टमाटर भी खराब हो रहे हैं। किसान वर्ग हर तरफ से परेशान ही परेशान दिखाई दे रहा है। प्रगतिशील किसानो का कहना है कि पहली बार हमने पारम्परिक खेती से हटकर मिर्च, टमाटर आदि सब्जी का बिजान किया था लेकिन वो भी किसानों को संकट से नही निकाल पाई है।

फसलों के खर्चे ज्यादा है और उसके अनुरूप आय कम। वही ऊपर से खाद -बीज व डीजल बढ़ते भावों के कारण खेती करना मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि सरकार की पूँजीवादी नीतियों के कारण खेती पर लागत लगातार बढती जा रही और कर्ज तले दबकर खेती घाटे का सौदा हो गई है। सरकार को किसानों की समस्याओं का उचित निराकरण करना चाहिए। किसानों कहना है कि खेती के लिए जमीन भी घट रही है और लोगों का खेती से रुझान भी हट रहा है।

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