श्रीगंगानगर। राइट टू हेल्थ बिल को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदेशभर में आंदोलनरत आईएमए के समर्थन में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के सामूहिक अवकाश पर रहने का असर करीब पचास फीसदी रहा। जिला अस्पताल में 75 में से 61 चिकित्सक गैर हाजिर रहे जबकि जिले के विभिन्न सीएचसी, पीएचसी व अन्य जगह कार्यरत 185 में से 69 चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहे। पहले जिला प्रशासन और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को आंशका थी कि शत प्रतिशत सरकारी चिकित्सक गैर हाजिर रहेंगे लेकिन सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सीएमएचओ और पीएमओ को सरकारी चिकित्सकों के अवकाश नामंजूर करने के निर्देश दिए थे। जिले के 23 सीएचसी और जिला मुख्यालय पर पांच यूपीएचसी में अर्बन नंबर-2, वार्ड नंबर चार व पांच, अशोक नगर, पुरानी आबादी और यूपीएचसी गुरुनानक बस्ती में यूटीबी डॉक्टर्स व आयुष एमओ की ड्यूटी लगाई गई हैं। चार दर्जन डॉक्टर्स की सीएचसी व पीएचसी आदि पर ड्यूटी लगाई गई है।रोगियों का बढ़ा दर्द: सरकारी डॉक्टर्स के सामूहिक अवकाश के बावजूद चिकित्सा व्यवस्था संचालित
वहीं, ऑल राजस्थान प्राइवेट हॉस्पिटल्स संघर्ष समिति की ओर से आंदोलन 12वें दिन भी जारी रहा। वहीं आईएमए के समर्थन में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने बुधवार को सामूहिक अवकाश लेकर आईएमए के आंदोलन का समर्थन किया। जिले में सेवारत चिकित्सकों के सामूहिक रूप से अवकाश पर जाने से जिला चिकित्सालय में चिकित्सा व्यवस्था ठप होने की बजाय सामान्य रूप से संचालित हुई। हालांकि ऑपरेशन की प्रक्रिया ठप रही और वहीं अन्य जांच प्रक्रिया बाधित रही। लेकिन जिला चिकित्सालय में रेजिडेन्टस डॉक्टर और मेडिकल काॅलेज के शिक्षकों ने व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया। पीएमओ डा. केएस कामरा ने बताया कि बुधवार को 61 गैर हाजिर रहे जबकि 41 चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दी। रेजिडेन्टस डॉक्टर्स और मेडिकल काॅलेज के शिक्षकों ने ओपीडी की व्यवस्था संभाली। इस दौरान नर्सिग स्टाफ ने भी अपनी सेवाएं जारी रखी। इससे पहले आईएमए की टीम चिकित्सालय परिसर में डयूटी दे रहे रेजिडेन्ट्स डॉक्टर्स को अपने साथ लेने आई थी, तब ऐसे लगा कि कार्यरत चिकित्सकों और आईएमए की टीम के साथ टकराव हो सकता हैं। लेकिन वहां पहले से तैनात पुलिस कर्मियो की टीम ने राजकीय बाधा डालने का हवाला दिया गया तो यह टीम वापस लौट आई। इस संबंध में पीएमओ का कहना है कि उनको इस टीम के बारे में जानकारी मिली तो वे पहुंचे तो उससे पहले ही सुरक्षा कर्मियों ने वापस भेज दिया था।
इस बीच, जिला चिकित्सालय में ज्यादातर शहरी क्षेत्र से अधिकांश रोगी उपचार कराने के लिए आए ही नहीं। वे ही लोग आए जिनको आंदोलन का पता नहीं था। अपना उपचार कराने आई ढींगांवाली गांव की जसवीर कौर ने बताया कि अस्पताल आए तब पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं। उसके मनोरोग चिकित्सक से दवाईयां लिखवानी थी लेकिन कोई चिकित्सक नहीं मिला तो बिना जांच कराए वापस लौटने की मजबूरी हैं। इधर, हिन्दुमलकोट क्षेत्र से आए मनजीत सिंह का कहना था कि आंखों में काफी दिनों से दर्द चल रहा था, यहां आया तो चिकित्सक हड़ताल पर हैं लेकिन नेत्र रोग ओपीडी में बैठी युवा चिकित्सक ने उसका चेकअप करने के बाद दवाईयां दी हैं।
इधर, आईसीयू सहित कई वार्डो में भर्ती रोगियों का उपचार करने के लिए चिकित्सक गैर हाजिर रहने पर पीएमओ डा.केएस कामरा ने खुद कमान संभाली। डा.कामरा रेजिडे्टस डॉक्टरों को ओपीडी कैम्पस में भी देखने के लिए पहुंचे। वहीं उपनियंत्रक डा. राजकुमार बाजिया ने प्रशासनिक व्यवस्था को देखा। इधर, नर्सिग अधीक्षकों को प्रत्येक वार्ड में चिकित्सा सुविधा की रिपोर्ट मांगी।
इधर, राजकीय जिला चिकित्सालय में भर्ती होने वाले रोगियों के वार्ड हाउसफुल जैसे हो गए हैं। आईएमए की हड़ताल का असर वार्डो में पड़ने लगा हैं। कई वार्डो में तय बैड से ज्यादा रोगी भर्ती हो गए हें। जिला चिकित्सालय में बुधवार को सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक 1204 रोगी ओपीडी में उपचार कराने के लिए पहुंचे तो वहीं 61 नए रोगी वार्डो में भर्ती हुए।
——————-
यूं हुई भर्ती रोगियों की संख्या
वार्ड निर्धारित बैड भर्ती रोगी
आर्थो वार्ड मेल 26 21
आर्थो वार्ड फिमेल 13 09
बच्चों की नर्सरी वार्ड 12 14
चिल्ड्रन वार्ड 12 12
जच्चा बच्चा वार्ड 58 140
मेडिकल वार्ड मेल ए 26 17
मेडिकल वार्ड मेल बी 26 28
मेडिकल वार्ड फिमेल ए 26 23
मेडिकल वार्ड फिमेल बी 13 13
क्षय रोग वार्ड 06 04
कैदी वार्ड 12 02
बुजुर्ग वार्ड 10 10
सर्जिकल वार्ड मेल 32 33
सर्जिकल वार्ड फिमेल 26 36
बर्न वार्ड 12 03
आईसीयू वार्ड 12 08
आई वार्ड 20 77
कैँसर वार्ड 08 03
कुल योग 370 441
—————————————–