श्रीगंगानगर। राजकीय जिला चिकित्सालय का इमरजेंसी कक्ष। बुधवार दोपहर करीब दो बजकर दस मिनट का समय। इतने में हूर्टर की आवाज लगाती एम्बुलैंस 108 आई और तीन घायलों को उतारा। वहां मौजूद टीम ने इन घायलों की पट्टी और मलहम भी लगाई। इन घायलों के साथ आए लोगों का कहना था कि दो मोटरसाइकिलों के बीच दुर्घटना हुई। यह दुर्घटना गणेशगढ़ के पास हुई थी, इसके बाद यहां लेकर आए। इमरजेंसी में डयूटी पर कार्यरत महिला चिकित्सक ने तीनों को प्राथमिक उपचार करवाने के बाद मेल सर्जिकल वार्ड में शिफ़ट करने के आदेश किए। इन घायलों में से दो जने काफी ज्यादा गंभीर थे जिनको स्ट्रेचर पर लिटाकर ले जाने लगे। लेकिन वहां तैनात कार्मिकों ने यह कहते हुए रोक दिया कि इन तीनों का पहले चिरंजीवी योजना में पंजीयन होगा।
ढाबां झलार गांव निवासी जसकरण सिंह के मुंह और हाथों से खून आ रहा था। वहीं सरदारपुरा जीवन निवासी साहिल के भी ज्यादा चोटें आई हुई थी जबकि साहिल के भाई आकाश भी अपनी चोटों के बावजूद पैदल चलने को मजबूर था। घायल जसकरण बेहोश था लेकिन उसके पिता बार बार उपचार के लिए वार्ड में ले जाने की जल्दबाजी करने लगे। लेकिन चिंरजीवी योजना के काउंटर पर इस रोगी का पंजीयन कराने में करीब आठ मिनट का समय लग गया। उसके हाथ में लगी गूलकोज की ड्रीप भी आउट हो गई, खूब बहने लगा। वहीं दूसरे घायल साहिल के पंजीयन में भी करीब पांच मिनट का समय व्यतीत हुआ। इन घायलों के साथ आए परिजनों ने इस पंजीयन को बाद में कराने की बात कही तो वहां काउण्टर पर बैठे कार्मिकों का कहना था कि यह बहुत जरूरी हैं।
घायल रोगियों के आधार कार्ड, मोबाइल नम्बर और उनकी फोटो ऑनलाइन अपलोड कर यह कार्मिक बोला कि इस चिरंजीवी योजना में पंजीयन होने से राजस्व जिला चिकित्सालय को मिलता हैं। परिजन भी निजी डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण सरकारी इमरजेंसी से जितनी सेवाएं मिल रही थी, उसे मजबूर होकर स्वीकार करने पर चुप्पी साध गए।
इस बीच, ऑन रिकार्ड भले अनगणित कार्मिक सरकारी डयूटियां पर हो लेकिन इमरजेंसी में एक ही वार्ड बॉय देखने को मिला। इस वार्ड बॉय ने इन तीनों घायलों में से दो घायलो के स्ट्रेचर को वार्ड में शिफ्ट करने के लिए प्रयास किया लेकिन अकेला इन दोनेां स्ट्रेचर को कैसे घसीट सकता था तो उसने एक घायल के परिजनों से सहयोग मांगा। इन परिजनों ने भी उपचार को प्राथमिकता देते हुए सहयोग किया।
इसी इमरजेंसी में एक और घायल डाल कॉलोनी निवासी पप्पू पुत्र मनीराम पहुंचा। इस घायल ने बताया कि वह इंदिरा कॉलोनी में निर्माणाधीन मकान में मजदूरी कर रहा था कि दोपहर करीब बारह बजे छत के नीचे पट़टी जैसे ही सिरकी तो वह नीचे आ गिरा। सिर पर चोटें आई तो इमरजेंसी में पट्टी बांधी गई। इसे भी वार्ड में शिफ्ट करने की सलाह दी गई तो वार्ड बॉय का इंतजार किया गया।
इधर, इमरजेंसी में एक रोगी को लेकर आए युवक ने वहां बैठे नर्सिग स्टाफ से बोला कि मुझे तो अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाना हैं। वहां नर्स ने पास बैठी महिला चिकित्सक की ओर इशारा किया तो वह इस चिकित्सक के समक्ष पेश हो गया। यही सवाल भी उससे कर दिया। इस चिकित्सक ने उपचार के बारे में पूछा तो फिर इस युवक ने यही सवाल किया तो उन्होंने डॉक्टरों के घर पर इलाज कराने की नसीहत दे दी।