
railway station
श्रीगंगानगर.
रेलवे के अधिकारियों-कर्मचारियों की शह पर रेलगाडिय़ों में फेरी वाले सरेआम बिना विभागीय अनुमति के खाद्य पदार्थों की बिक्री कर रहे हैं। 'राजस्थान पत्रिका' की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि रेलगाडिय़ों में खाद्य पदार्थ बेचने वाले फेरी वाले रेलवे कर्मचारियों को हिस्सा राशि देते हैं, जिसके बाद इन्हें गाडिय़ों में खाद्य पदार्थ बेचने के लिए गुपचुप तरीके से हरी झंडी मिल जाती है। इस प्रकार फेरी वाले गाडिय़ों में एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जाकर गैर कानूनी तरीके से गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थ यात्रियों को बेच रहे हैं।
यह मामला स्टेशन पर नियुक्त आला अधिकारियों सहित आरपीएफ और जीआरपी के ध्यान में भी है, इसके बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाना संदेहास्पद है। मिलीभगत के इस खेल में श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ और हनुमानगढ़ से श्रीगंगानगर रेल मार्ग पर चलने वाली एक दर्जन रेल गाडिय़ों में सफर करने वाले सैकड़ों यात्रियों को घटिया खाद्य पदार्थ बेची जा रहे हैं। इससे गाडिय़ों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दाल कितनी पुरानी, इसका जवाब नहीं
पत्रिका संवाददाता ने श्रीगंगानगर आने वाली दो रेल गाड़ी में सफर किया। इस दौरान कई फेरी वाले खाद्य पदार्थ बेचने डिब्बों में आए। इनमें सर्वाधिक संख्या दाल बेचने वालों की थी। लोहे की एक बाल्टी में दाल भरी हुई थी, साथ में कुछ टमाटर, प्याज व नींबू रखे थे। बाल्टी ऊपर से खुली थी तो स्वाभाविक था कि बाहर से डिब्बे में आ रही मिट्टी उस दाल में मिल रही थी। दाल कितने दिन पुरानी थी, यह भी एक पहेली थी। दाल बेचने वालों के अलावा गोलियां, बिस्कुट, आइसक्रीम, पापड़, भुजिया वाले भी डिब्बों में बार-बार चक्कर लगा रहे थे। देखने से ही पता चल रहा था कि सभी खाद्य पदार्थ किसी ब्रांडेड कंपनी के नहीं, बल्कि लोकल फैक्ट्री में ही बनाए गए हैं।
पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई
रेल गाडिय़ों में खाद्य पदार्थों की बिक्री करना गलत है। खाद्य व पेय पदार्थों में मिलावट कर कई बार यात्रियों को बेहोश कर लूटने की घटनाएं भी हुई हैं। इस संबंध में दो बार जीआरपी और आरपीएफ थाना प्रभारी को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
-डीके त्यागी, स्टेशन अधीक्षक, श्रीगंगानगर।
Published on:
19 Jun 2018 10:00 pm

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