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26 साल से रोटी पकाते-पकाते हाथ घिस गए लेकिन नहीं हुई स्थाई

-एवं अधिकारिता विभाग के छात्रावास में करती है रसोइया पद पर काम-कई जगहों पर छात्रावासों में कर चुकी है काम

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26 साल से रोटी पकाते-पकाते हाथ घिस गए लेकिन नहीं हुई स्थाई

श्रीगंगानगर.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के छात्रावास में निवास कर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए रोटी पकाते-पकाते हाथ घिस गए लेकिन विभाग ने अभी तक स्थाई नहीं किया। यह कहना है राजकीय अंबेडकर स्वच्छ छात्रावास 22 पीसी में रसोईयां का काम करने वाली बुजुर्ग महिला ज्योति का। ज्योति ने बताया कि 1992 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के छात्रावास में पहले कन्या छात्रावास और फिर बीकेएम छात्रावास में नियमित रूप से छात्र-छात्रों के लिए भोजन बनाने का काम कर रही हूं।

इस कार्य में मेरी पूरी जिंदगी छात्रावास में बीत गई लेकिन अभी तक स्थाई नहीं की गई। जब छात्रावास में लगी थी तब 250 रुपए नौकरी मिलती थी लेकिन अब उसकी तनख्वाह जरूरी 4300 रुपए हो चुकी है लेकिन उनको अभी भी स्थाई होने की उम्मीद है। उसका कहना है कि कुछ रसोईयां मेरे से बाद छात्रावास में लगे थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्थाई कर दिया गया लेकिन मेरी कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

ज्योति कहती है कि अब भी उसको उम्मीद है कि राज्य की मुख्यमंत्री मेरी आवाज को सुनेगी और में एक दिन स्थाई रसोईयां होगी। हालांकि अब उसका स्वास्थ्य पहले ही तुलना में बहुत कमजोर हो चुका है। अब उसका बेटा कृष्ण भी साथ रहता है। वह बहुत भोला है इसलिए उसको कोई ज्यादा इधर-उधर की जानकारी नहीं है। हालांकि वह ज्योति के साथ भोजन बनाने में सहयोग करता है।
हाथ की सफाई-छात्रावास के छात्रों ने बताया कि ज्योति के हाथ की सफाई देखते ही बनती है।वह चपाती बहुत ही शानदार बनता ही है और एक भी चपाती जलने नहीं देती।


यहां आकर ही बस गई
ज्योति मूल रूप से समस्तीपुर बिहार की रहनी वाली है। करीब 26 साल पहले बिहार से श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर कस्बे में आ गई। वहां पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के कन्या छात्रावास में भोजन बनाने के लिए रसोईयां का काम करने लगी। वह कन्या छात्रावास से बाद बीकेएम छात्रावास में भोजन बना रही है। इसका कोई घर-बार नहीं है वह छात्रावास में ही रहती है। जब से यहां पर आई तब से नियमित रूप से छात्रावास में भोजन बनाने का काम करती है। इसके परिवार में कोई नहीं है और उसका बेटा कृष्ण ही है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अब रसोईयां एजैंसी के माध्यम से ही काम करते हैं। इस बीच 1997 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कुछ रसोईयां को विभाग ने स्थाई किया था। इस बीच ज्योति काम छोडकऱ गांव चली गई। इस कारण इसका प्रकरण बीच में ही रह गया।
बीपी चंदेल, सहायक निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, श्रीगंगानगर।