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नि:शुल्क जांच व्यवस्था गड़बड़ाई

चिकित्सालय प्रबंधन ने छह दिन बाद भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। मंगलवार को रिकॉर्ड 2 हजार से अधिक की ओपीडी और करीब 100 रोगी इनडोर में भर्ती हुए हैं।

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श्रीगंगानगर.

राजकीय जिला चिकित्सालय में होली के बाद एकाएक रोगियों की भीड़ बढ़ गई। मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच व दवा योजना में लैब टैक्नीशियन सहित 18 कर्मचारियों को ड्यूटी पर नहीं लिया गया। इस कारण सोमवार और मंगलवार को चिकि त्सालय में चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से गड़बड़ाई हुई हैं। एक साथ छह लैब टैक्नीशियन के नहीं आने पर चिकित्सालय में अब विभिन्न प्रकार के जांच कार्य प्रभावित हो रहे हैं। चिकित्सालय प्रबंधन ने छह दिन बाद भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। मंगलवार को रिकॉर्ड 2 हजार से अधिक की ओपीडी और करीब 100 रोगी इनडोर में भर्ती हुए हैं।

इस कारण रोगियों की संख्या में इजाफा होने पर सेवाएं प्रभावित हुई हंै। चिकित्सालय में रोगियों की पर्ची, डॉक्टर से परामर्श, जांच और दवा लेने के लिए चिकित्सालय के दवा काउंटर पर लंबी-लंबी कतार लगी रही। जांच काउंटर समय से पहले ही बंद कर दिया गया। जब शाम चार बजे फिर से काउंटर खुला तो बहुत कम रोगियों को जांच रिपोर्ट मिल पाई। इस कारण रोगियों को जांच रिपोर्ट नहीं मिलने पर वे डॉक्टर को चेकअप नहीं करवा पाए।


नहीं हो रही सुनवाई
चिकित्सालय की राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी सदस्य गोपाल तरड़ ने बताया कि कॉटेज में मरीज भर्ती हैं और इनको जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। मंगलवार को पीएमओ से मिलकर जांच रिपोर्ट समय पर दिलवाने की मांग की गई। इस पर पीएमओ ने कहा कि आपकी जांच रिपोर्ट करवा देते हैं लेकिन सवाल उयह उठता है कि आम मरीज की जांच रिपोर्ट समय पर कौन करवाएंगा? दूर-दराज से आने वाले रोगियों की जांच नहीं होने पर हर कोई मरीज परेशान हैं।


इनको नहीं लिया जा रहा ड्यूटी पर
जिला चिकित्सालय में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में लैब टैक्नीशियन विवेक सचदेवा, आकाश बतरा, रोशन लाल, रोहित शर्मा, नवीन कुमार, आदराम, कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक कुमार, दीदार सिंह, रेडियोग्राफर सुरेंद्र कुमार,प्रमोद कुमार, रामकुमार, सहायक कर्मचारी धर्मवीर, राधेश्याम, नवीन यादव, हेल्पर रेखा,अंजू देवी, राजेश नेगी व मुकेश कुमार आदि को एक मार्च से ड्यूटी पर नहीं लिया जा रहा है। पीएमओ का कहना है कि विभाग को लिखा हुआ है लेकिन इनका अभी तक समायोजन करना है या नहीं? कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला है।


किया जा सकता है समायोजन
जिला चिकित्सालय में अत्यधिक कार्य बोझ की वजह से 2013 में 20 नर्सिंग कर्मचारी, 20 लैब एस्सिटेंट,15 डीडीसी हेल्पर की नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई थी। जिला चिकित्सालय में जेएसएसवाई में दस, एफबीएनसी में छह, एमटीसी में एक व एनसीडी में तीन पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन नर्सिंग कर्मियों को इन पदों पर समायोजित किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में राजस्थान नर्सिंग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रविंद्र शर्मा के नेतृत्व में नर्सिंग कार्मिक विधायक कामिनी जिंदल, चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ आदि से मिलकर इन कर्मियों का समायोजन करवाने की मांग की है। मंत्री ने आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है और किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाने की बात कही है।

हम क्या कर सकते हैं
चिकित्सा विभाग ने इन कर्मचारियों के वेतन के लिए फंड जारी करने से मना कर दिया है। अब एक साथ कर्मचारी लैब में कम होने पर सेवाएं तो प्रभावित होंगी। इसमें अब हम भी क्या कर सकते हैं।
डॉ.सुनीता सरदाना, पीएमओ, जिला चिकित्सालय,श्रीगंगानगर।