
गवार मूंग फसल ने दिया दगा, कर्ज से दबे किसान
घड़साना.
क्षेत्र के सिंचित तथा बारानी किसानों को एक बार फिर खेती से निराशा मिली है। फसल का उत्पादन कम होने के कारण किसान मायुस है वहीं बाजार में मंदी का माहौल नजर आ रहा है। मूंग व गवार की फसल दगा देने के कारण किसान चारों ओर से कर्जे के बोझ में दब गया है। कर्जा उतारने का भार किसानों को अभी से सताने लगा है। गौरतलब है कि इस बार किसानों ने सावणी की बम्फर बिजाई की थी।
बिजाई के बाद कई बार हुई बुंदाबांदी के कारण तीन-तीन बार बुवाई करनी पड़ी थी। बीज तथा मंहगे भाव का डीजल लेकर किसान ने कर्जे का भार तो बढा लिया। बिजाई अनुरुप पैदावार नहीं होने तथा खेती में खर्चे अधिक पडऩे के कारण किसान कर्जे से चारों ओर घिर गया है। अब किसान सरसों की बुवाई के साथ गेहूं की बुवाई के लिए अभी से तैयारी में लगा हैं। गेहूं की बुवाई होने पर किसान को खाने लायक दाना तथा पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होगा। नहरों में पानी की स्थिति खराब रहने से किसान की चिन्ता दिनोंदिन बढ रही है।
किसान बीरबल राम कासनिया, राकेश जाखड़, विनोद ढाका आदि ने बताया कि उपखंड क्षेत्र में सिंचित कृषि करने वाले किसानों ने इस बार एक बारी सिंचाई के पानी से नरमा की बुवाई कर ली। वहीं जून-जुलाई माह में मूंग व गवार की बम्फर खेती कर ली। अगस्त माह के मध्य तक एक दो बार हुई बरसात से फसलें जोरदार होने की संभावना बन गई। लेकिन बाद में तापमान का बना रहने तथा सिंचाई पानी की कमी के चलते गवार व मूंग की फसल खराब हो गई। गवार की फसलें मुरझाने पर किसानों को चिन्ता में डाल दिया।
प्रति बीघा चार से पांच क्ंिवटल गवार का उत्पादन के स्थान दो ढाई क्ंिवटल पर रह गया है। इसी तरह मूंग की खेती के हालात बन गए है। सिंचाई वाले क्षेत्र में मूंग की बुवाई इस बार अधिक की। लेकिन मौसम की मार तथा पानी की कमी के चलते किसानों को खेती की लागत का आधा हिस्सा भी नहीं मिल पाएगा। गांव 28 एएस के किसान नौरंगलाल पारीक ने बताया कि मूंग व गवार की फसल इस बार कमजोर रहने से किसान घाटे में है। त्यौंहार फीका- दीपावली के चंद रोज रहने के बावजूद कस्बे के बाजारों से रौनक गायब है।
धानमंडी में गवार, मूंग तथा नरमा की आवक बहुत कम हो रही है। किसान फसल बेच कर सरसों बुवाई के खर्चे चुका रहा है। वहीं किसान ने बैंक से केसीसी, सहकारी बैंक से अल्पकालीन ऋण, आढतियों से उधारी तथा इधर-उधर से कर्जा लेकर खेती पर लूटा चुके हैं। इन कर्जों को चुकाने के लिए किसान के पास विकल्प नहीं है। ऐसी स्थिति में बाजार में हालात मंदी के दौर वाले रहेंगे।
फसल नुकसान का मिले बीमा
किसानों ने बताया कि फसल उत्पादन कम होने का नुकसान प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ है। बीमा कम्पनियों को प्रीमियम दे दिया गया है। लेकिन बीमा कम्पनियां सरकारी नीतियों के कारण क्लेम नहीं दे रही है। ऐसी स्थिति में बीमा कम्पनियों की लूट से किसान कर्जें में चले गए हैं। किसानों का कहना है तीन-तीन बार मूंग-गवार की बुवाई करनी पड़ी थी। किसान प्रशासन से बीमा क्लेम दिलाने के लिए प्रदर्शन कर मांग कर चुकें है।
Updated on:
15 Oct 2017 06:39 am
Published on:
15 Oct 2017 06:34 am
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