श्रीगंगानगर। आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने तीन साल की लंबी कशमकश के बाद अरोड़वंश ट्रस्ट के अध्यक्ष अंकुर मगलानी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के साथ साथ जिलाध्यक्षों का मनोनयन किया गया है। प्रदेश की टीम में गहलोत खेमे को तवज्जों दी गई है जबकि पायलट खेमे को नजर अंदाज किया गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई टीम में इलाके से सादुलशहर विधायक जगदीशचन्द्र जांगिड़ और पूर्व मंत्री जगतार सिंह कंग को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं महासचिव पद पर अनूपगढ़ की शिमला नायक, प्रदेश सचिव के पद पर अनूपगढ़ की रामदेव बावरी और सूरतगढ़ के गगन वंडिंग को मनोनीत किया है।
मगलानी को पार्टी में गहलोत और पायलट खेमों के कांग्रेसियों को एक मंच पर लाने के लिए भी सभी वर्गो को साथ लेकर सत्ता और संगठन के बीच दूरियों को दूर करने की चुनौती भी रहेगी। वही अरोड़वंश समाज को तवज्जो देकर कांग्रेस ने अरोडवंशी कार्ड खेलने की तैयारी कर ली है। युवा चेहरे के रूप में मगलानी को पूरे जिले में प्रचारित करने की तैयारी की जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई टीम में रायसिंहनगर विधानसभा से एक भी कांग्रेसी नहीं है। जबकि श्रीगंगानगर विधानसभा से अंकुर मगलानी को जिलाध्यक्ष बनाकर तवज्जों दी है। वहीं सादुलशहर से विधायक जगदीश चन्द्र जांगिड़ को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। श्रीकरणपुर से पूर्व मंत्री जगतार सिंह कंग को भी प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर जगह दी है। इधर, अनूपगढ़ में जिला प्रमुख कुलदीप इंदौरा के विकल्प में शिमला देवी नायक को प्रदेश महासचिव और रामदेव बावरी को प्रदेश सचिव बनाकर नए समीकरण बनाने के संकेत किए है। उधर, सूरतगढ में गगन वंडिंग को प्रदेश सचिव के रूप में टीम में शामिल किया गया है।
प्रदेश में पायलट के इस्तीफे देने का असर इलाके की राजनीति पर असर पड़ा, तब 14 जुलाई 2020 को पायलट समर्थन में तत्कालीन जिलाध्यक्ष संतोष सहारण और महासचिव श्यामलाल शेखावटी ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जिलाध्यक्ष की कुर्सी खाली रही। हालांकि कांग्रेस ने बीकानेर के जिया उर रहमान को जिला संयोजक बनाकर संगठनात्मक गतिविधियां संचालित की।
अंकुर मगलानी को जिले में गुटों में बंटी कांग्रेस को एक मंच पर लाने की चुनौती रहेगी। इसमें श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र में गौड़ और चांडक खेमा, श्रीकरणपुर में कुन्नर और संधू खेमा, रायसिंहनगर में तीनों खेमे पूर्व विधायक दौलतराज नायक, सोना बावरी, सोहन नायक, सादुलशहर में विधायक जांगिड़ और बिश्नोई खेमा, सूरतगढ़ में मील और गेदर खेमा, अनूपगढ़ में इंदौरा और नायक खेमा के बीच समन्वय बनाने के लिए जोर अजमाइश करनी होगी।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट के लिए तीन चेहरे दौड़ में थे। पहला राजकुमार गौड़, दूसरा अंकुर मगलानी और तीसरा अशोक चांडक, तब पार्टी हाईकमान ने दिल्ली में बुलाए गए इनसें से चांडक को टिकट दी थी। ऐसे में गौड़ और मगलानी को दरकिनार कर दिया गया। लेकिन मगलानी ने पार्टी का साथ दिया। इधर, गौड़ ने कांग्रेस से बगावत कर चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। इस चुनाव के बाद चांडक और गौड़ समर्थकों के बीच चली खींचतान अब तक जारी है। वहीं मगलानी दोनों गुटों में सर्वमान्य रहे, उन्होंने सिर्फ चुप्पी साधी। जिलाध्यक्ष की दौड़ में मगलानी के नाम पर अधिकांश कांग्रेसियों ने सहमति दी। अरोड़वंश बिरादरी को पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर के बाद यह दूसरी बार बड़ा पद मिला है।
इस बीच, मगलानी का कहना था कि पार्टी हाईकमान ने नई जिम्मेदारी दी हैं। ऐसे में संगठन को मजबूत कर फिर से चुनाव में कांग्रेस को बेहतर परिणाम देने का प्रयास करेंगे। सभी को एक साथ लाने का प्रयास किया जाएगा।