
श्रीगंगानगर.
बालिका के जन्म के साथ ही गांव में लगता है एक पौधा और उस पौधे की वृद्धि के साथ ही होता है बालिकाओं का विकास। इलाके में इन गतिविधियों को अंजाम दे रहा है महिला अधिकारिता विभाग। विभाग क्षेत्र में बेटियां बचाने के लिए प्रयास कर रहा है।
बेटी को बचाएं पौधों की तरह
विभागीय जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में बेटियां बचाने के लिए शुरू की गई मुहिम में बालिका के अभिभावकों की उपस्थिति में पौधा लगाया जाता है। उन्हें समझाया जाता है कि जिस तरह से आप इस पौधे के प्रति स्नेह रखें, ठीक उसी प्रकार बालिकाओं को भी विकास करने दें। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए नवरात्र जैसे अवसरों का भी उपयोग किया जाता है।
नवरात्र पर बेटियों का सम्मान
विभाग ने बेटियों की महत्ता कायम करने के लिए नवरात्र पर बेटियों के सम्मान की परम्परा शुरू की है। पिछले दिनों चैत्र नवरात्र पर बेटियां बचाने का संकल्प अभिभावकों और ग्रामीणों को दिलाया गया।
सकारात्मक रहे परिणाम
विभाग के प्रयासों के परिणाम भी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। विभाग के अधिकृत सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2013-14 जहां जन्म के समय प्रति एक हजार बालकों पर 956 बालिकाएं थीं, वहीं ये वर्ष 2017-18 में बढ़कर 968 तक पहुंच गई है। इस बीच वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा 917 पर भी पहुंच गया, लेकिन फिर एक बार इसके लिए हुए प्रयासों का परिणाम रहा कि यह संख्या वर्ष 2015-16 में 933, 2016-17 में 952 तथा वर्ष 2017-18 में 968 पर पहुंच गया।
इनका कहना है
कर रहे हैं प्रयास
इलाके में बालिकाओं की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बेटियों के जन्म के समय पौधे लगाने का कार्य किया जा रहा है। कई अन्य प्रमुख अवसरों पर लोगों को बेटियों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाता है।
-विजय कुमार, सहायक निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग
Published on:
14 Apr 2018 09:15 pm

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