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श्री गंगानगर

मोदी जिलाध्यक्ष और प्रांतीय प्रतिनि​धियों में गोदारा गुट जीता

Godara faction won in Modi district president and provincial representatives- राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के चुनाव में आया रोचक परिणाम

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श्रीगंगानगर। राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के चुनाव में संजय मोदी जिलाध्यक्ष निर्वाचित हुए है। मोदी ने निर्वतमान जिलाध्यक्ष अनिल गोदारा को 24 वोटों के अंतर से हराया। वहीं प्रांतीय प्रतिनिधियों के छह पदों पर गोदारा गुट के सभी प्रत्याशी विजयी रहे। दोनों खेमों में सुबह से लेकर शाम तक गहमागहमी बनी रही। जैसे परिणाम घोषित हुआ तो गुलाल बिखेर कर खुशी का इजहार किया।
चुनाव अधिकारी सुभाष मिड्ढा ने बताया कि कुल 301 में से 284 वोट पोल हुए। इसमें गोदारा को 129 वोट मिले जबकि मोदी के पक्ष में 153 वोट डाले गए। वहीं दो वोट निरस्त किए गए। प्रांतीय प्रतिनिधियों के छह पदों के लिए कुल 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इसमें मोदी गुट के छह प्रत्याशी चुनाव हार गए जबकि गोदारा गुट के सात में छह प्रत्याशी जीते। इस चुनाव परिणाम में राजेन्द्र प्रसाद शर्मा 156 वोट, सुरेन्द्र बिश्नोई 154 वोट, श्याम सुंदर बिश्नोई 151 वोट, पंकज कुमार 136 वोट, पवन कुमार 133 वोट और ओमप्रकाश शाक्य 135 वोट लेकर निर्वाचित हुए। संजीव धारीवाल महज एक वोट से चुनाव हार गए।
इस चुनाव में मतदान सुबह आठ बजे से दोपहर बारह बजे तक हुए। वहीं यहां जिला मुख्यालय पर बार संघ सभागार के अलावा अनूपगढ़, घड़साना, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, श्रीकरणपुर, सादुलशहर, सूरतगढ़, पदमपुर में भी मतदान के बाद पोलिंग पार्टियां दोपहर करीब तीन बजे वापस आई। शाम चार बजे से वोटों की गिनती का काम शुरू हुआ। परिणाम तय करने के लिए करीब ढाई घंटे का समय लगा।
इस संगठन में दोनों गुटों का दबदबा रहा है। गोदारा खेमे से अनिल गोदारा, ओमप्रकाश शाक्य, श्याम सुंदर बिश्नोई जिलाध्यक्ष रह चुके है। वहीं मोदी खेमे से संजय मोदी खुद भी जिलाध्यक्ष रहे थे। इन दोनों खेमों की लंबे समय से खींचतान रही है। इधर, मोदी ने अपने समर्थकों के साथ कोर्ट कैम्पस से लेकर घर तक विजयी जुलूस निकाला।
अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मचारियों और आसपास दुकानदारों में भी इस चुनाव का परिणाम जानने की उत्सुकता बनी रही। शाम चार बजे से शाम साढ़े छह बजे प्रांतीय प्रतिनिधियों के चुनाव परिणाम ने खूब उलझाया। इस चुनाव में एक वोटर को सात वोट देने का अधिकार था, इसमें एक जिलाध्यक्ष पद के लिए तो वहीं छह प्रांतीय प्रतिनिधियों को वरीयता क्रम देना जरूरी था। इस वरीयताक्रम का परिणाम बनाने में देर लगी तो मतगणना स्थल के बाहर लोगों का तांता लगा रहा।