
हाइकोर्ट जस्टिस ने केस निपटाने के लिए यह दी नसीहत
श्रीगंगागर। राजस्थान उच्च न्यायालय के जस्टिस मदन गोपाल व्यास का कहना है कि न्याय देने से पहले पत्रावलियों पर आए तथ्यों और साक्ष्यों के साथ साथ पेश की गई रूलिग़्स के निष्कर्ष करना जरूरी हैं। गहन विश्लेषण के आधार पर निर्णय करना होगा। व्यास रविवार को यहां जिला कलक्ट्रेट सभागार में राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के न्यायिक अधिकारियों की संयुक्त कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कानूनी पहलूओं के अनुरुप विश्लेषण संबंधित पहलूओं के बारे में अपनी बात रखी। इससे पहले मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का आगाज किया।
इस कार्यशाला में संपत्ति की जब्ती, सीआरपीसी की धारा 451 और 457 के तहत मामलों का निर्णय करते समय अहम पहलूओं, संपत्ति की रिहाई या निपटाने के लिए अदालत की भूमिका, खान और खनिज संशोधन अधिनियम, राजस्थान वन अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, सीआरपीसी की धारा 451 के तहत मजिस्ट्रेट के क्षेत्राधिकार, राजस्थान उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत जब्त किए गए अवैध शराब ले जा रहे ट्रक को एस्कॉर्ट कर रहे वाहन को रिहा करने पर कोर्ट की शक्तियां, सीआरपीसी की धारा 451 के तहत करेंसी नोटों का निपटारा करते समय उचित दृष्टिकोण, संपत्ति पर दावा करने और सुनवाई का अधिकार के बारे में न्यायिक अधिकारियों ने अपना अपना तर्क दिया।
इस दौरान श्रीगंगानगर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण व्यास और हनुमानगढ़ के जिला एवं सैशन न्यायाधीश के प्रतिनिधि के रूप में रूपचंद सुथार ने अपने अपने जिले में कानूनी प्रकरणों के निस्तारण के बारे में फीडबैक दिया। वहीं न्यायिक अधिकारियों रचना बिस्सा और रिदम अनेजा ने कार्यशाला का मंच संचालन किया।
इस दौरान न्यायिक अधिकारी दीपक कुमार, राजकुमार, राजेंद्र शर्मा,मदन गोपाल आर्य, अरुण कुमार अग्रवाल, अशोक कुमार टाक, महेंद्र के. सोलंकी, सुरेश कुमार प्रथम, विनोद कुमार गुप्ता, गजेन्द्र सिंह तेनगुरिया, सरिता चौधरी, विजय कोचर, नवदीप, हनुमानगढ़ के न्यायिक अधिकारी राजेश शर्मा आदि मौजूद थे।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न न्यायिक अधिकारियों ने कई पेचीदा कानूनी पहलूओं पर फोकस किया। इसमें आपराधिक मामले में आरोपी के यदि बरी होने पर उसकी संपत्ति को वापस दी जा सकती या नहीं, दोषमुक्त होने पर संबंधित आरोपी से बरामद की गई संपति या वस्तु को वापस लेने का अधिकार हैं या नहीं, लावारिश मानकर तहत जब्त की गई संपत्ति के निपटने और जब्ती की रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को करते समय किन किन प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विचार करना होगा, किसी अपराध में शामिल होने के संदेह वाले बैंक खाते को जब्त किया जा सकता हैँ या नहीं, सरकारी अधिकारियों के खिलाफ साक्ष्य पर किन कानूनी पहलूओं का ध्यान रखना उचित रहता हैँ, इसके बारे में भी जानकारी दी गई।
Published on:
10 Sept 2023 10:35 pm
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