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‘अ’ अनपढ़ से ‘ज्ञ’ ज्ञानी बनाने वाली भाषा है हिंदी

श्रीकरणपुर. हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया

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‘अ’ अनपढ़ से ‘ज्ञ’ ज्ञानी बनाने वाली भाषा है हिंदी

‘अ’ अनपढ़ से ‘ज्ञ’ ज्ञानी बनाने वाली भाषा है हिंदी

श्रीकरणपुर. हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं व रचनाकारों ने हिंदी भाषा की महत्ता बताते हुए इससे जुड़ी रचनाएं पेश की। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त बीइइओ जयप्रकाश शर्मा थे। कार्यक्रम का आगाज मां सरस्वती की वंदना से किया गया।
मुख्य अतिथि शर्मा ने कहा कि हमारे देश के अलग अलग प्रांतों में कई प्रकार की बोलियां और भाषाएं बोली जाती हैं। लेकिन देश को एकसूत्र में पिरोने वाली भाषा हिंदी ही है। कार्यक्रम अध्यक्ष राजकीय चिकित्सालय प्रभारी डॉ. नीरज अरोडा ने कहा कि हिंदी हमारे देश की शान है। उन्होंने सुख में सब साथी दुख में नो कोई भजन भी सुनाया। मंचासीन विशिष्ट अतिथि प्रधानाचार्या शक्ति कटारिया, बलदेव सैन, बैंक के मुख्य प्रबंधक पीसी मीणा व प्रबंधक श्रवण व्यास ने भी विचार रखे। काव्य गोष्ठी के दौरान बैंककर्मी सुखदेव कुमार ने कहा कि जहां अंग्रेजी ए फॉर एप्पल से शुरू होकर जैड फॉर जेबरा यानि गधे तक ले जाने वाली भाषा है। वहीं, हिंदी ‘अ’ अनपढ़ से ‘ज्ञ’ ज्ञानी बनाने वाली भाषा है। उन्होंने भगवान राम की स्तुति कर सभी श्रोताओं का ध्यान अपनी ओर आर्कषित किया।

शुगर हो तो जुबान में हो...
कार्यक्रम में शामिल बेटियों अर्पिता वर्मा ने करो अपनी भाषा से प्यार, आरजू कंबोज ने शान हमारी हिंदी है, सोनिया मौर्य ने जीतने के लिए जुनून चाहिए तथा पूजा वर्मा ने हिंदी हैं हम रचना सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर किया। कवि कुलविंद्र सिंह ने आओ हम हिंदी बोलें, गुरजिंद्र सिंह ने ख्वाब में आई तीन भाषाएं, मुकेश कंबोज ने शान की भाषा है हिंदी तथा शिक्षक जगदीश वर्मा ने दो व्यंग्यात्मक लघुकथाओं के माध्यम से हिंदी अपनाने का आह्वान किया। इसके अलावा व्याख्याता देवीलाल यादव ने नशे से दूर रहें, शिक्षक कन्हैया जगवानी ने शुगर हो तो जुबान में हो, महेन्द्रसिंह मौडां ने अभिनंदन का अभिनंदन है, ललित बंसल ने जिंदगी जब सिंहर गई, प्रदीप कुमार ये मेरा हिंदुस्तान है व प्रदीप अश्क ने तीसरी बेटी नामक रचना सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी। कार्यक्रम प्रभारी बैंककर्मी वासुदेव गर्ग ने गलत नंबर का सुंदर जूता भी पैर को राहत नहीं देता रचना सुनाकर हिंदी की महत्ता का बखान किया। जयकिशन चौहान, मुकेश राजपुरोहित, श्यामसुंदर वधवा, सूर्य प्रकाश, हरबंस सचदेवा, अधिवक्ता विनय गर्ग, संदीप गुप्ता व छोटू राम आदि ने भी विचार रखे। रचनाकारों को बैंक प्रबंधन की ओर से पुरस्कृत किया गया।