श्रीगंगानगर. राइट टू हेल्थ बिल को वापस लेने की मांग पर ऑल राजस्थान प्राइवेट हॉस्पिटल्स संघर्ष समिति की ओर से आंदोलन सातवें दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में राज्य सरकार की चिरंजीवी व आरजीएचएस योजनाओं का बहिष्कार का सिलसिला जारी रहने से रोगियों के ऑपरेशन अटके रहे। इधर, आईएमए से जुड़े चिकित्सकों ने कलक्ट्रेट के समक्ष धरना देकर सभा की। वहां वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार की हठधर्मिता का सिलसिला जारी रहा तो चिकित्सक समुदाय प्रदेश से पलायन को मजबूर हो जाएगा।
वक्ताओं का कहना था कि सरकार की चिरंजीवी व आरजीएचएस योजनाओं के माध्यम से प्राइवेट अस्पतालों में सुविधा दी जा रही थी फिर राइट टू हेल्थ बिल लाने की क्या जरूरत थी। इस बिल को लागू करने के लिए सरकार ने चिकित्सको की पीड़ा नहीं सुनी। कई वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री और आला अफसर स्वास्थ्य सुधार के नाम पर राजकोष को हानि पहुंचाकर व्यक्तिगत फायदा उठा रहे हैं। इस धरने पर आईएमए के जिला सचिव डा. हरीश रहेजा, डा. भरतपाल मय्यर, डा. दीपक गर्ग, डा. अनिल मिश्रा, डा. संजीव चुघ, डा. पीयूष राजवंशी, डा. संदीप सिहाग, डा. जितेन्द्र सारस्वत, डा. दीपक चौधरी, डा. प्रहलाद गौड़, डा. महेश भारती, डा. भूपेन्द्र भूतना आदि मौजूद थे। इस धरने पर आरएलपी के अनिल गोदारा भी पहुंचे और उन्होंने सरकार को सबक सिखाने की बात कही। इधर, आईएमए के पदाधिकारियों के अनुसार शनिवार को जयपुर में प्रदेश स्तरीय पड़ाव रखा जाएगा, इसमें इलाके से काफी चिकित्सक पहुंचेंगे।
इस बीच, अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर प्रदेश भर के राजकीय जिला चिकित्सालय सहित पूरे जिले के सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर शुक्रवार को सुबह नौ बजे से 11 बजे तक ओपीडी बंद कर आईएमए के आंदोलन का समर्थन किया। इस दौरान रोगियों को अधिक समस्या आई। लगातार दो घंटे चिकित्सकों के कामकाज पर आने का इंतजार करना पड़ा। करीब दो घंटे चिकित्सालय परिसर में ओपीडी परिसर में चिकित्सक नजर नहीं आए। लेकिन जिला चिकित्सालय में जैसे ही सुबह 11 बजे तो फिर से ओपीडी की प्रक्रिया शुरू हुई। वहां इतनी भीड़ आई कि कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रोगियों को तीन लाइन लगवानी पड़ी। यही हाल पर्ची काउण्टर, ब्लड जांच केन्द्र, इमरजेंसी सेवा केन्द्र, मेडिसीन ओपीडीपी, आर्थो ओपीडी, दंत रोग ओपीडी, नेत्र रोग ओपीडी आदि पर देखने को मिला।
जिला चिकित्सालय में सभी चिकित्सा कर्मिकों और चिकित्सकों के अवकाश पर रोक लगा रखी हैं। सरकार रोजाना रोगियों की संख्या, निशुल्क जांच केन्द्र और निशुल्क दवा योजना के तहत लाभांविंतों की संख्या का फीडबैक ले रही हैं। जिन चिकित्सकों को पहले अवकाश की अनुमति दी थी, उनको निरस्त कर दी गई हैं। पीएमओ डा.केएस कामरा ने बताया कि जिन चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों ने पीएमओ या उपनियंत्रक से अवकाश का अनुमोदन नहीं कराया हैं तो संबंधित चिकित्सा कर्मियों और चिकित्सकों को नोटिस थमाए गए है। सीनियर नर्सिग स्टाफ को इमरजेंसी की रात्रिकालीन पारी में डयूटियां भी लगाई गई है।
श्रीगंगानगर पैरामेडिकल एसोसिएशन और मेडिकल लैब टैक्नीशियन एसोसिएशन के अलावा दंत रोग चिकित्सक संघ ने समर्थन देकर कामकाज का बहिष्कार किया है सबसे ज्यादा समस्या लैबों के ताला लगने से हुई हैं। पूरे जिले में करीब ढाई सौ लैब की दुकानें है। जबकि जिला मुख्यालय पर सवा सौ लैब हैं। चौथे दिन शुक्रवार को भी लैब टैक्नीशियनों को आईएमए के समर्थन में दुकानें बंद रखनी पड़ी। श्रीगंगानगर पैरामेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र मुटनेजा ने बताया कि जब तक आईएमए अपना आंदोलन वापस नहीं लेती तब वे अपना कामकाज नहीं करेंगे।