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कम पानी में कारगर है जोजोबा की खेती

—परम्परागत फसलों की तुलना में कम खर्च —पौधा दो से 55 डिग्री तापमान सह सकने में सक्षम—45 हजार रु.प्रति हेक्टेयर तक सरकारी अनुदान श्रीगंगानगर के किसान करणवीर सिंह जोजोबा की खेती से चार बीघा में 10 से 12 क्विंटल तक इसकी पैदावार ले रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

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कम पानी में कारगर है जोजोबा की खेती

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मिलता है अधिक लाभ
पानी की कमी वाले क्षेत्रों में जोजोबा की खेती कारगर सिद्ध हो रही है। परम्परागत खेती की तुलना में किसानों को अधिक लाभ मिलता है।

किसान की होती है धैर्य की परीक्षा
जोजोबा का पौधा दो से 55 डिग्री तापमान सह सकता है। इसमें किसान के धैर्य की परीक्षा होती है पांचवें साल में फ ल मिलता है। जहां पानी रुकता है, वहां जोजोबा का पौधा विकसित नहीं हो पाता । एक नर के अनुपात में 10 मादा पौधे लगाए जाते है ।

तेल अत्यधिक गुणवतापूर्ण
3 से 5 मीटर तक की ऊंचाई वाले इस पौधे की आयु 200 वर्ष होती है। यह सदाबहार पौधा है जो बहुत ही धीमी गति से विकास करता है। इसके बीज में 45 से 55 प्रतिशत तक तेल मिलता है। जोजोबा का तेल अत्यधिक गुणवतापूर्ण होता है। जोजोबा के तेल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने में होता है। तेल निकालने के बाद बचे मैटीरियल को सल्फ र से ट्रीट करने पर ल्यूब्रिकेंट बनता है। जिसका उपयोग मशीनों व हवाई जहाज में होता है।

सरकारी अनुदान से मिलता लाभ
राजस्थान जोजोबा के कुल उत्पादन का 80 से 90 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सरकार भी इसकी खेती को प्रोत्साहन देने के लिए अनुदान देती है जो कि 45 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर है। किसान ने वर्ष 2006 में इसकी शुरुआत की थी। पांच वर्ष बाद बार पौधों में फल लगने की शुरुआत हुई। शुरुआती दो सालों तक पैदावार कम रही। पौधों के परिपक्व होने पर पैदावार भी बढ़ रही है।

दर्शन बरार — श्रीगंगानगर


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