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टिकट हाथ में, यात्री प्लेटफार्म पर और सीटी देकर रेल हो गई रवाना

श्रीकरणपुर.

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Railway station

टिकट हाथ में, यात्री प्लेटफार्म पर और सीटी देकर रेल हो गई रवाना

-श्रीकरणपुर में अधिक भीड़ के कारण कई यात्री नहीं पकड़ पाए श्रीगंगानगर जाने वाली रेल
-यात्रियों ने किया हंगामा, रिफंड की मांग

यात्रा टिकट होने के बावजूद रविवार सुबह बड़ी संख्या में यात्री श्रीगंगानगर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में सवार होने से रह गए। बताया जा रहा है कि पीटीईटी परीक्षा होने के कारण रेल के सातों डिब्बे खचाखच भरे थे। रेल नहीं मिलने से हुई असुविधा और टिकट के रिफंड को लेकर मौके पर मौजूद करीब ढाई-तीन सौ यात्रियों ने स्टेशन अधीक्षक के समक्ष रोष जताया। करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रकरण के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर आखिरकार यात्रियों को बिना रिफंड के निराश होकर लौटना पड़ा।

दो की जगह बारह मिनट खड़ी रही रेल
जानकारी अनुसार रविवार सुबह सूरतगढ़ से चलकर श्रीगंगानगर जाने वाली रेल अपने निर्धारित समय नौ बजकर 40 मिनट से करीब आधा घंटा देरी से यहां पहुंची। रुकने के तय समय दो मिनट की बजाय 12 मिनट खड़ी रहने के बावजूद करीब ढाई-तीन सौ यात्री ट्रेन में सवार नहीं हो सके।

यात्रियों के मुताबिक ट्रेन में प्रत्येक डिब्बा पहले ही खचाखच भरा था। परीक्षार्थी युवक दरवाजों पर लटके थे। इससे यात्रियों खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को रेल में सवार नहीं होना ही मंजूर करना पड़ा। दस बजकर बाइस मिनट पर टे्रन से वंचित रहे यात्रियों ने हंगामा कर दिया। उन्होंने स्टेशन मास्टर हंसराज खिरोड़ के समक्ष रोष जताया और टिकट वापस कर रिफंड की मांग रखी। खिरोड़ ने कई यात्रियों को इसी टिकट पर दोपहर वाली गाड़ी से जाने की बात कहते हुए नियमानुसार रिफंड नहीं होने की बात कही।

...जाएं तो जाएं कहां ?
वार्ड पांच निवासी कैलाश देवी और ममता ने बताया कि अबोहर जाने के लिए उन्होंने श्रीगंगानगर के चार टिकट खरीदे। रेल नहीं मिलने से जहां उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ वहीं, अब उन्हें बसों की महंगी यात्रा भी करनी होगी। इसी प्रकार वार्ड 19 निवासी मनोज कुमार, बीरबल राम, मीनू आसवानी, इंदु पोपटानी, गीता, ज्योति, गांव नौ एफएफ बड़ोपल के बिंद्र सिंह, संदीप कौर आदि यात्रियों ने श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के लिए खरीदे गए टिकट व्यर्थ जाने की बात कही। उनका कहना था कि परीक्षा के मद्देनजर रेल प्रशासन को अतिरिक्त डिब्बों का इंतजाम करना चाहिए था। हंगामें के दौरान स्टेशन अधीक्षक रमेश शर्मा भी वहां पहुंचे और रेल नियमों की जानकारी देते हुए यात्रियों को शांत कराया।

डीआरएम को होगी शिकायत
उधर, रेल संघर्ष समिति के संयोजक बलदेव सैन ने घटनाक्रम पर रोष जताते हुए रेल प्रशासन पर कई आरोप लगाए। सैन ने कहा कि करीब छह साल पहले ब्रॉडगेज शुरू होने पर पैसेंजर गाडियों में 12 डिब्बे थे। अब यात्रीभार बढऩे के बावजूद डिब्बों की संख्या घटकर छह या सात कर दी गई है। सैन ने कहा कि परीक्षा के मद्देनजर गाड़ी में अतिरिक्त डिब्बे लगने चाहिए थे। रेल अधिकारियों की अदूरदर्शिता का खमियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा। यह सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने ताजा मामले की शिकायत डीआरएम और अन्य उच्चाधिकारियों से करने की बात कही।
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‘भीड़ के मद्देनजर गाड़ी कुछ अतिरिक्त समय के लिए रुकी। तीस रुपए प्रति टिकट से कम मूल्य की टिकट का रिफंड नहीं दिया जा सकता। गाड़ी से वंचित रहे अधिकांश यात्री श्रीगंगानगर जाने वाले थे। और वहां का किराया महज 15 रुपए है। डिब्बे बढ़ाना उच्चाधिकारियों के हाथ में है।’
रमेश शर्मा, स्टेशन अधीक्षक श्रीकरणपुर।