श्रीगंगानगर। करीब नौ साल पहले पदमपुर क्षेत्र गांव रत्तेवाला में अपनी गर्भवती पत्नी की पीट पीट कर हत्या करने के जुर्म में अदालत ने आरोपी पति को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व चौबीस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। यह निर्णय यहां महिला उत्पीड़न एवं दहेज प्रकरण की स्पेशल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता ने सुनाया।
विशिष्ट लोक अभियोजक बलवंत बिश्नोई ने बताया कि 28 नवम्बर 2014 को रतेवाला गांव निवासी सिंकदरलाल पुत्र गरीबचंद ओड राजपूत की ओर से पदमपुर पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसमें बताया कि उसकी बहन ममता रानी की शादी 2009 को पीलीबंगा वार्ड चार निवासी चिमनलाल पुत्र सांईदास से हुई थी। शादी के बाद दहेज और पहली डिलीवरी में बच्ची की पैदाइश होने पर चिमनलाल ने ममतारानी को तंग करने लगा। दूसरी डिलीवरी के लिए उसकी बहन वे अपने गांव लेकर आ गए। 22 नवम्बर 2014 को चिमनलाल उसके घर आया और लाठियों से ममतारानी पर हमला कर दिया। इस शोरशराबे से पड़ौसी आ गए तो चिमनलाल वहां से भाग गया। गंभीर हालत में पदमपुर से ममता को श्रीगंगानगर जिला चिकित्सालय लेकर आए। यहां हालत ज्यादा खराब होने पर चिकित्सकों ने 25 नवम्बर 14 को बीकानेर पीबीएम रैफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने बताया कि पेट में ज्यादा चोटें लगने से ममता और उसकी पेट में बच्ची की बचाने का प्रयास किया लेकिन इनदोनों की 26 नवम्बर 14 को मृत्यु हो गई। पीबीएम बीकानेर से सूचना मिलने पर पदमपुर पुलिस ने मृतक के परिजनों से बयान और पीबीएम से मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरेापी चिमनलाल के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया।
अदालत ने पीलीबंगा वार्ड चार निवासी चिमनलाल पुत्र सांईदास को आईपीसी की धारा 302 में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व दस हजार रुपए जुर्माना, धारा 316 में दस साल कठोर कारावास व दस हजार रुपए जुर्माना, धारा 323 में एक साल कारावास व एक हजार रुपए, धारा 498 ए में तीन साल कारावास व तीन हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना जमा होने पर मृतका ममता रानी की बेटी स्नेहा को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश भी किए।