
लो जी लग गया राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी पर अब ताला
श्रीगंगानगर. विधानसभा चुनाव में भाजपा की विदाई के साथ ही जिला मुख्यालय पर राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी पर ताला लग गया।
पंजाबी साहित्य और भाषा के संबंध में आ रही अड़चनों और विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में पंजाबी भाषा शिक्षकों या व्याख्याताओं के पदों को लेकर होने वाली समस्याओं को सरकार के बीच यह अकादमी सेतु का काम करती है लेकिन विधानसभा चुनाव में जैसे ही भाजपा की विदाई हुई तो जिला मुख्यालय पर जिला परिषद परिसर में संचालित इस राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी को भी बंद कर दिया।
हालांक राज्य सरकार की ओर से एक अधिकारी और एक बाबू कार्यरत है लेकिन उनको भी अन्य कार्यो में डयूटियां लगाने से पूरी प्रक्रिया को ही बंद कर दिया गया है।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के राजस्थान प्रभारी अविनाश खन्ना के समधी रवि सेतिया को यहां पंजाबी अकादमी का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था लेकिन उनके पास राज्य मंत्री का दर्जा होने होने के कारण तत्कालीन कलक्टर ज्ञानाराम ने खूब किरकिरी भी की थी।
जब 8 जून 2018 को सेतिया अपने समर्थकों के अलावा भाजपा पदाधिकारियेां के साथ तत्कालीन जिला कलक्टर ज्ञानाराम के पास शपथ लेने पहुंचे तो कलक्टर ने यह कहते हुए वापस लौटा दिया कि यह सिर्फ संगठन है, राज्य मंत्री का दर्जा नहीं है।
ऐसे में सेतिया समर्थकों ने इसकी शिकायत भाजपा हाईकमान से की थी। हालांकि सेतिया का दावा था कि वे राज्य मंत्री के रूप में यहां अकादमी अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए है। लेकिन 11 दिसम्बर 2018 को विधानसभा का परिणाम आया तो अकादमी अध्यक्ष का पद स्वत: ही खत्म हो गया। पिछले तीन महीने से अब तक कोई भी अध्यक्ष नहीं है।
अकादमी का अधिकृत कार्यालय प्रदेश में कहीं भी नहीं है। ऐसे में तत्कालीन अध्यक्ष सेतिया ने अपने समथी भाजपा के राजस्थान प्रभारी अविनाश खन्ना के माध्यम से जिला मुख्यालय पर अकादमी का ऑफिस खुलवाने के लिए आग्रह किया था,
सेतिया खुद जयपुर जाकर चक्कर भी काटे तब तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे ने श्रीगंगानगर जिला प्रशासन को अकादमी का आफिस खोलने के लिए निर्देश दिए। इस आदेश में भी जिला प्रशासन ने काफी देरी की। जिला परिषद परिसर में विधानसभा चुनाव से ठीक दो महीने पहले यह कार्यालय खोला गया था।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ दोनों जिलों में पंजाबी बाहुल्य है। ऐसे में पंजाबी विषय के लिए लंबे समय से अकादमी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर राजनीति दलों में खींचंतान रही है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों में इस अकादमी के अध्यक्ष पद पाने के लिए सीधी सीएम तक सिफारिश करवानी पड़ती है। भाजपा के राज में अकादमी का अध्यक्ष किसे बनाया जाएं, यह मुददा करीब साढ़े चार साल गूंजता रहा।
लेकिन भाजपा की राज्य सरकार ने कार्यकाल के छह महीने पहले ही इसकी नियुक्ति दे दी तो भाजपाईयों के आपस में तकरार भी बढ़ी। लेकिन सेतिया की नियुक्ति के बाद वह फायदा नहीं मिला जिसे भाजपा की उम्मीदें थी।
Published on:
24 Mar 2019 10:36 pm
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