7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेहरी से जमता है चंग का रंग

-प्रतिदिन एक घंटा मेकअप के बाद बनती है मेहरी

2 min read
Google source verification

श्रीगंगानगर.

होली के लिए चंग मंडलियां तैयार हैं। कई तरह के धमाल गाए जाने लगे हैं, लेकिन धमाल मंडली की सबसे अहम किरदार है मेहरी।होली की मस्ती में जब युवक चंग पर थिरकते हैं तो मंडली में एक दो युवा महिला का रूप धरकर भी आते हैं, यही किरदार है मेहरी। इस किरदार के रूप में नाचना आसान नहीं है। कई बार कुछ मेहरियां खुद को इतना खूबसूरत तरीके से सजाती हंै कि देखने वाले उनके पुरुष होने पर विश्वास ही नहीं कर पाते हैं। श्रीगंगानगर में भी ऐसी मेहरियां हैं। ये मेहरियां जहां एक ओर सजने पर एक से डेढ घंटा दैनिक लगाती हैं, वहीं इनके बोलने का लहजा और अन्य गतिविधियां भी होली के अवसर पर महिलाओं जैसी ही रहती हैं।


डूबते हैं पर्व की मस्ती में

मरुधर घूमर कला मंच के लिए मेहरी बनने वाले मोनू बताते हैं कि होली आती है तो मस्ती में डूबकर नाचते हैं, फिर किरदार चाहे होली के रसिया का हो या मेहरी का। मेहरी का किरदार इसलिए अलग है क्योंकि इसमें महिला के रूप में ही रहना पड़ता है। ढफ की थाप पर युवकों के नाचने के दौरान बीच में नृत्य के लिए उतरना पड़ता है। सबसे खास बात यह है कि चंग मंडली के बाकी सदस्यों के मुकाबलें करीब एक घंटे पहले कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना पड़ता है ताकि मेकअप किया जा सके।


कई बार होती है छेड़छाड़

मोनू बताते हैं कि श्रीगंगानगर में करीब दस से बारह लोग ऐसे हैं जो मेहरी का किरदार निभाते हैं। करीब चार चंग मंडलियां श्रीगंगानगर में हैं और प्रत्येक में तीन से चार मेहरी होती हैं। वे बताते हैं कि कई बार तो उनका मेकअप इतना अच्छा हो जाता है कि युवक उन्हें वास्तव में युवती ही समझ लेते हैं। चंग धमाल के दौरान नाचते समय और डांस के बाद भी कई बार छेड़छाड़ तक का सामना करना पड़ता है लेकिन जब युवकों को असलियत पता लगती है तो वे झेंप कर रह जाते हैं।