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श्री गंगानगर

सवा चार साल बाद फिर याद आया मिनी सचिवालय

Mini secretariat remembered again after four and a half years- सीएम ने पूरक बजट घोषणा में मिनी सचिवालय निर्माण का किया वादा

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श्रीगंगानगर. पुरानी शुगर मिल की करीब सवा सौ बीघा भूमि पर मिनी सचिवालय, वाणिज्यिक कर विभाग और आबकारी विभाग के लिए भवन और नए न्यायालय भवन का सपना आज भी अधूरा है। करीब सवा चार साल कार्यकाल में मिनी सचिवालय की नींव की खुदाई तक शुरू नहीं हो पाई है। लेकिन विधानसभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अब फिर से मिनी सचिवालय का जिक्र जरूर किया। लेकिन बजट देने के नाम पर खुलासा नहीं किया। वहीं वाणिज्यिकर भवन का निर्माण भी अटका है। इन दोनों प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे ने शुगर मिल की भूमि पर शिलान्यास किया। उस समय यह दावा किया गया था कि वाणिज्यिक कर विभाग को किराये के भवन से छुटकारा मिलेगा और खुद का आलीशान भवन कामकाज के लिए मिलेगा।

एक ही छत के नीचे सरकारी कार्यालयों के संचालन के लिए मिनी सचिवालय के निर्माण की नींव रखी गई। दोनों भवनों के निर्माण का जिम्मा राजस्थान राज्य सडक़ विकास एवं निर्माण निगम को दिया गया।शिलान्यास समारोह के कुछ महीनों बाद प्रदेश में सरकार बदली तो इस प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गए। हालांकि कर भवन के लिए 13 करोड़ रुपए आए भी। लेकिन शेष बजट अभी अटका हुआ है।
विदित रहे कि पुरानी राजस्थान गंगानगर स्टेट शुगर मिल्स लिमिटेड की 128 बीघा भूमि में से 25 बीघा भूमि पर प्रदेश का पहला सात मंजिला मिनी सचिवालय बनना था। लेकिन पांच साल से एक रुपए का बजट नहीं आया। तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे ने वर्ष 2018 में शिलान्यास किया था। इसके निर्माण पर 175 करोड़ के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया था। निर्माण कार्य की एजेंसी आरएसआरडीसी को बनाया गया लेकिन राज्य सरकार ने बजट जारी नहीं किया । मिनी सचिवालय की भूमि पर मलबे के ढेर लगने लगे हैं। लोगों ने वहां अपने निर्माणाधीन घरों और दुकानों का मलबा डालना शुरू कर दिया है।

पांच साल पहले जब इस भूमि पर शिलान्यास किया था तब यह भूमि समतल थी। सात मंजिला के प्रस्तावित इस मिनी सचिवालय में छह लिफ्ट लगाने का खाका तैयार किया गया। पीडब्ल्यूडी और टाउन प्लानर की ओर से इस भवन का ले-आउट प्लान तैयार कर राज्य सरकार से स्वीकृत करवाया। मिनी सचिवालय में जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक, एडीएम प्रशासन, एडीएम सतर्कता, एसडीएम, समाज कल्याण, जल संसाधन, पेयजल, अनुसूचित जाति, जनजाति, कृषि, उद्यान, अपील राजस्व अधिकारी कार्यालय, रसद विभाग, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, चुनाव शाखा, सांख्यिकी, रोजगार, श्रम, ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय संचालित होने थे।