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श्री गंगानगर

फसलों की कटाई में ज्यादा मेहनताना, मनरेगा से मोहभंग

More labor in harvesting crops, disillusionment with MNREGA- श्रीगंगानगर जिले में 47 हजार मनरेगा श्रमिक कर रहे है काम, पहले थे अस्सी हजार से अधिक श्रमिक

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श्रीगंगानगर। खेतों में फसलों की कटाई होने से श्रमिकों का महात्मा गांधी मनरेगा योजना से मोहभंग हो रहा है। गांवों में इन दिनों सरसों व गेहूं समेत रबी की फसलों की कटाई व कम्बाइन थ्रेसिंग का काम चल रहा है। श्रमिक कटाई में जुटे हुए है। ऐसे में जिले में नरेगा योजना के काम की गति थम सी गई है। जब से फसलों की कटाई शुरू हुई, तब से मनरेगा से श्रमिकों के पलायन का दौर भी शुरू हो गया। मनरेगा के आंकड़ों में जिले की कुल 344 में से 343 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य चल रहा है। जिले में मजदूरों का आंकड़ा अस्सी हजार से घटकर 47 हजार तक रह गया हैं। लगातार ग्राफ कम होने पर जिला परिषद प्रशासन ने सर्वे कराया तो इन दिनों फसल कटाई के सीजन में ज्यादातर मजदूर मनरेगा की बजाय खेतों में काम करते नजर आए। इधर, ज्यादातर मनरेगा में वे ही श्रमिक आ रहे है जिनको खेत में काम करना पसंद नहीं हैं या विषम पिस्थितियों के कारण खेतों में मजदूरी नहीं कर रहे हैं। मनरेगा में कार्य के लिए डिमांड नहीं मिलने से मस्टररोल जारी नहीं हो पा रही है। ऐसे में यू कहा जा सकता है कि फावड़े गैती से श्रमिकों का हाथ छूट गया है।
श्रमिकों की वर्ष में दो बार फसल की कटाई के समय मजदूरों की डिमांड ज्यादा रहती है। इस दौरान फसलों की कटाई में अधिक मजदूरी मिलने से मनरेगा से श्रमिकों का साथ छूट जाता है। इस कारण रबी की फसल की कटाई के समय मनरेगा में श्रमिकों की संख्या ज्यादा कम हो जाती हैं। इधर, महियांवाली गांव में महिला मनरेगा श्रमिकों को पर्याप्त काम नहीं दिया जा रहा हैं। राज्य सरकार ने जिन मजदूरों के 100 दिवस होने पर 25 दिन अतिरिक्त काम कराने के निर्देश दे रखे है लेकिन महियांवाली गांव में अधिकांश महिलाओं को एक सौ दिन का कार्य के लिए फार्म तक नहीं भरवाए गए हैं। इस संबंध में पंचायत समिति के विकास अधिकारी तक शिकायत पहुंची लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मनरेगा के तहत अनुमत कार्यों में से वर्तमान में जिले में खेतों में पानी की डिग्गियां, नहर की लाइनिंग सुधारने का कार्य, ग्रेवल सडक़, जोहड़ पायतन, इंटरलॉकिंग सडक़, खेल मैदान, पौधारोपण,कचरा संग्रहण केंद्र आरआरसी, कंपोस्ट केंद्र, मॉडल लाइब्रेरी निर्माण, नाला निर्माण आदि कार्य हो रहे है।
महात्मा गांधी नरेगा योजना में जॉब कार्डधारक श्रमिक को 100 दिन का प्रतिवर्ष रोजगार मिलता है। इस योजना के तहत जिले में औसतन 231 रुपए प्रतिदिन की श्रमिकों काम के आधार पर दिहाड़ी मिलती है। वहीं इन दिनों फसल कटाई के लिए एक मजदूर को 300 से 350 रुपए मजदूरी के मिल रहे हैं। ऐसे में कमाई के सीजन में मजदूरों ने मनरेगा से मुंह मोड़ लिया है।
अगले महीने बढ़ेगी मजदूरों की संख्या मनरेगा में अप्रेल से जून तक श्रमिकों की संख्या में बढ़ोतरी रहती है। पूरे जिले में करीब अस्सी से एक लाख तक श्रमिक मनरेगा से अपने परिवार को लालन-पालन करते है। जबकि अभी मार्च में फसलों की कटाई चल रही है। फसल कटाई में मजदूरों को अधिक मेहनताना मिलने से मनरेगा के प्रति रूझान नहीं रहता। ऐसे में फसल कटाई पूरी होने पर श्रमिकों के द्वारा रोजगार की मांग की जाती है। गर्मियों के दिनों में मनरेगा कार्यों में श्रमिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है।
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जिले में मनरेगा कार्य
ब्लॉक ग्राम पंचायत मनरेगा श्रमिक
घड़साना 36 5796
श्रीविजयनगर 29 5260
अनूपगढ़ 32 4712
श्रीकरणपुर 35 3260
श्रीगंगानगर 53 7325
पदमपुर 36 7656
रायसिंहनगर 47 5049
सूरतगढ़ 49 4426
सादुलशहर 27 4296
कुल योग 344 47780
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