श्रीगंगानगर.झालावाड़ जिले में हाल ही में स्कूल भवन की छत गिरने की घटना के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्रीगंगानगर जिले के स्कूल भवनों का सर्वे करवाया गया। इसमें कई जर्जर भवनों और कक्षा-कक्षों को खतरनाक पाया गया। अब जिले के नौ ब्लॉकों में 200 से अधिक कक्षा-कक्ष और भवनों को जमींदोज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद अब तक बजट की मंजूरी नहीं मिल पाई है।18 अगस्त को हुई जिला निष्पादन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन भवनों की स्थिति पूरी तरह जर्जर है, उन्हें तुरंत गिराया जाए। इससे पहले भी कुछ स्कूलों को जमींदोज करने का फैसला लिया गया था। अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) समग्र शिक्षा श्रीगंगानगर की ओर से कहा गया कि यह कार्रवाई एसडीएमएसी से प्राप्त प्रस्तावों और अभियंताओं की अनुशंसा के आधार पर की जा रही है।
अभियंताओं से होगी पुन: जांच
जिले में अभी तक किए गए सर्वे में करीब 2400 कक्षा-कक्ष जर्जर व क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। इनकी स्थिति का सही आकलन कराने के लिए अन्य विभागों के अभियंताओं से फिजिकल वैरीफिकेशन कराया जाएगा। समग्र शिक्षा में फिलहाल ब्लॉक स्तर पर केवल एक-एक कनिष्ठ अभियंता ही है, ऐसे में बाहरी अभियंताओं से सहायता ली जाएगी।
बारिश से क्षतिग्रस्त भवन भी शामिल
विभाग ने उन स्कूलों से भी प्रस्ताव मांगे हैं, जिन्हें इस वर्ष भारी बारिश या अतिवृष्टि से नुकसान पहुंचा है। ऐसे भवनों की मरम्मत के लिए दो-दो लाख रुपए का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही बजट स्वीकृति मिलेगी, मरम्मत व पुनर्निर्माण का काम तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
थार योजना से आएंगे करोड़ों
जिले के स्कूल भवनों की मरम्मत और निर्माण के लिए राज्य सरकार को विस्तृत प्लान भेजा गया है। इसके अलावा जिला परिषद की ओर से थार योजना के तहत 12 से 14 करोड़ रुपए के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनसे प्राथमिकता से नए भवनों का निर्माण होगा।