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गंगानगर के सरसों तेल ने देश में बनाई अपनी पहचान

Mustard oil of Ganganagar made its mark in the country- सरसों महंगी होने से महज छह माह में दुगुने हो गए सरसों तेल के दाम

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Mustard oil

गंगानगर के सरसों तेल ने देश में बनाई अपनी पहचान,गंगानगर के सरसों तेल ने देश में बनाई अपनी पहचान

श्रीगंगानगर. इलाके में किन्नू के साथ साथ सरसों की फसल भी पूरे देश में अपनी पहचान बना ली है। इस कारण सरसों का तेल भी पूरे देश में बिकता है। ब्रांडेड कंपनियों ने इलाके के आढतियों और व्यापारियों से सरसों और सरसों तेल की खरीदने पर फोकस कर रखा है, इस कारण इस तेल की डिमांड अधिक हो गई है।

इन ब्रांडेड कंपनियों ने अपने मुनाफे के लिए सरकारों के माध्यम से खुला सरसों तेल पर प्रतिबंध लगाने की कवायद शुरू कर रखी है। इस कारण रिटेल दुकानदार ब्रांडेड कंपनियों के तेल बेचने को मजबूर है। वहीं इलाके में संचालित हो रही फैक्ट्रियों ने अपने अपने लोकल ब्रांड के माध्यम से ग्राहकों यह तेल बेच रहे है।

रिफाइंड से ज्यादा सरसों तेल की खपत अधिक रहती है। कोरोनाकाल में अधिकांश कारोबार ठप हो गए थे लेकिन सरसों तेल का क्रेज न केवल बकरार रहा बल्कि उसकी डिमांड के कारण लगातार दाम बढ़ते गए। पिछले छह माह में तो सरसों तेल के दाम दुगुने हो गए है।

रसोईघर में सबसे ज्यादा बिकने वाले इस खाद्य तेल के दाम बुधवार को भी दो सौ रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा था। जबकि अप्रेल के अंतिम सप्ताह में यह सरसों का तेल महज एक सौ रुपए पहुंचा था।

लेकिन सरसों तेल की डिमांड अधिक होने के कारण सरसों की फसल के दाम भी बढ़ गए। एेसे में व्यापारियों ने इस तेल के दाम दुगुने दामों पर पहुंचा दिए है। गुपचुप तरीके से इन दामों के बढऩे के बावजूद केन्द्र सरकार ने खाद्य तेलों का आयात की घोषणा नहीं की है।

इस कारण यह तेल गरीब आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। इधर, व्यापारियों की माने तो पूरे जिले में रोजाना औसतन पचास हजार लीटर सरसों तेल की खपत होती है। इस तेल के बेचान के कारोबार से करीब बीस हजार लोग जुड़े हुए है।

इस बीच, ऑयल मिलों के संचालकों की मानें तो कोरोना काल में सरसों तेल से इम्युनिटी सिस्टम अच्छा रहता है, इस कारण इस तेल की डिमांड अधिक हुई है।

कोरोना काल में सरसों तेल कारगर साबित हुआ है। सरसों तेल से इम्युनिटी सिस्टम दुरुस्त रहने और ह्रदय रोग जैसे बीमारियों से बचाव के लिए इस तेल को अधिक उपयोगी बताया था। ऐसे में दामों में इजाफा होना स्वभाविक था। इलाके में सरसों की खरीद अधिक रही है।

सरसों फसल की खरीद के लिए किसानों को पहली बार अच्छे दाम उस समय मिले है जब वह अपने खेतों से सीधा बेचान करने के लिए धानमंडी लेकर आया है। ज्यादातर सालों में किसानों की फसल बिकने के बाद बाजार में सरसों के दामों में उछाल आया था लेकिन इस बार सरसों के दाम शुरुआत में ही तेज होने लगे। इलाके में साढ़े आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से सरसों बिक चुकी है।

एमएसपी पर सरसों की कीमत 4690 रुपए प्रति क्विंटल तय की हुई है। एमएसपी के लिए सरकार ने राजफैड को अधिकृत किया था। इस सरकारी एजेंसी की ओर से खरीद केन्द्र बनाए ही नहीं गए। उससे पहले ही किसानों ने आढ़तियों को सीधे सरसों बेचने लगे। .