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सरसों में प्रति क्विंटल 700 रुपए का फटका

-कृष्ण चौहान-एमएसपी 5650 रुपए, बाजार भाव 5100 तक

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सरसों में प्रति क्विंटल 700 रुपए का फटका

सरसों में प्रति क्विंटल 700 रुपए का फटका

सरसों में प्रति क्विंटल 700 रुपए का फटका
-एमएसपी 5650 रुपए, बाजार भाव 5100 तक
-कृष्ण चौहान
श्रीगंगानगर. सहित राज्य भर में पिछले दो वर्षों में सरसों की बुवाई और उत्पादन में कमी आई है। इसका मुख्य कारण अपेक्षाकृत सरसों का भाव कम रहना है। इस सीजन में सरसों का एमएसपी 5650 रुपए है जबकि बाजार में औसत 700 रुपए प्रति क्विंटल कम मूल्य पर बिक रही है। नई धानमंडी में सरसों 4700 से 5100 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी। सरकार एमएसपी पर एक किसान से महज 25 क्विंटल सरसों खरीद रही है। राज्य में 36 लाख 21 हजार 249 हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई है, जबकि लक्ष्य 41 लाख हेक्टेयर था। पिछले वर्ष राज्य में 45 लाख 52 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी। श्रीगंगानगर खंड की बात की जाए तो इसमें 6 लाख 5 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई का लक्ष्य था, जबकि बुवाई 5 लाख 55 हजार 85 हेक्टेयर में हुई। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2020-21 और 2021-22 में सरसों का भाव अच्छा रहा। इस बीच 8500 रुपए तक भी सरसों बिकी। पिछले वर्ष सरसों का भाव 5200 रुपए औसत रहा। सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इससे अधिक था। इस कारण इस वित्तीय वर्ष में सरसों की बुवाई कम हुई।

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कानून बनने पर ही किसानों को राहत
एमएसपी पर खरीद का कानून बनने पर ही किसानों की अधिकांश समस्याओं का निस्तारण होगा। यह कहना है जय किसान आंदोलन के राज्य संयोजक रमन रंधावा का। उनका कहना है कि सरकार एमएसपी पर कुल उत्पादन का दस प्रतिशत ही खरीद करती है। यदि एमएसपी पर कृषि जिन्सों की संपूर्ण खरीद का कानून बन जाए तो किसानों को आर्थिक मार नहीं पड़ेगी।

सरसों का उत्पादन क्यूं कम हुआ
केंद्र के स्तर पर सरसों का आयात शुल्क कम कर देने से इंडोनेशिया, कनाडा, ब्राजील आदि देशों से बड़ी मात्रा में सरसों और सरसों का तेल आ रहा है। यही वजह है कि किसानों को सरसों की उपज के सही दाम नहीं मिल पा रहे। पॉम ऑयल भी सरसों में मिलाकर बेचा जा रहा है। इस पर सरकार की निगरानी नहीं है।

सबसे ज्यादा उत्पादन भरतपुर में

प्रदेश में सरसों का सर्वाधिक उत्पादन भरतपुर में होता है। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, करौली सहित अन्य क्षेत्र में अच्छी मात्रा में सरसों का उत्पादन होता है।

बुवाई का क्षेत्रफल कम हुआ

पिछले पांच वर्ष की बात की जाए तो राज्य में सरसों की औसत बुवाई 28 लाख 9 हजार हेक्टेयर में हो रही है। वर्ष 2022-23 में राज्य में रेकॉर्ड 45 लाख 52 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई। श्रीगंगानगर खंड में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 65 हजार 769 हेक्टेयर में सरसों की बुवाई कम हुई है। पिछले वर्ष इस खंड में 6 लाख 20 हजार 853 हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी।
इस सीजन सरसों का उत्पादन

-भारत में सरसों का उत्पादन-125 लाख मीट्रिक टन

-भारत में सरसों का केरी स्टॉक- 15 लाख मीट्रिक टन

-राज्य में सरसों का उत्पादन-42 लाख मीट्रिक टन

राज्य में पिछले पांच वर्ष में सरसों की बुवाई व उत्पादन

वर्ष बुवाई उत्पादन

2019-20 27.13 42.88
2020-21 26.17 44.82
2021-22 41.74 71.63
2022-23 37.98 64.75
2023-24 37.51 62.31
(बुवाई हेक्टेयर में और उत्पादन लख मीट्रिक टन में है। )

स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू नहीं की जा रही। इस कारण किसानों को कृषि जिन्सों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। केंद्र सरकार ने एमएसपी 5650 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि बाजार में 4700 से 5100 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
मनीराम पूनिया, प्रगतिशील किसान, गांव सांवतसर, पदमपुर।

इस बार मौसम ठीक रहा और श्रीगंगानगर सहित राज्य भर में इस बार सरसों का बंपर उत्पादन होने की उम्मीद है। वर्तमान में सरसों का भाव 4700 से 5100 रुपए प्रति क्विंटल है। उम्मीद है कि इस सीजन सरसों के भाव में कोई ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा। किसानों को औसत पांच हजार रुपए से कम भाव नहीं मिलेगा। सरसों के तेल का भाव श्रीगंगानगर में 105 रुपए प्रति लीटर तक चल रहा है।
दीपक कांडा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर एसोसिएशन।

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