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Video : शुगर मिल भूमि पर बनेगा नया कोर्ट भवन

पिछले साठ दशक के बाद अब जिला मुख्यालय पर नया कोर्ट कैम्पस बनाने के लिए आखिरकार हाईकोर्ट प्रशासन ने भी हामी भर दी है।

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श्रीगंगानगर।

पिछले साठ दशक के बाद अब जिला मुख्यालय पर नया कोर्ट कैम्पस बनाने के लिए आखिरकार हाईकोर्ट प्रशासन ने भी हामी भर दी है। नई कोर्ट बिल्डिंग 18 बीघा भूमि पर और छह बीघा पार्र्किंग के लिए आरक्षित की गई है।राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की जस्टिस निर्मलजीत कौर ने शनिवार को यहां पुरानी शुगर मिल परिसर और भूमि का जायजा लिया। यह मिल यहां से शिफ्ट होकर केसरीसिंहपुर के पास गांव कमीनपुरा हो चुकी है, ऐसे में मिल की 18 बीघा भूमि पर नया कोर्ट भवन बनाने के लिए राज्य सरकार के पास प्रस्ताव भिजवाया जाएगा। जिला प्रशासन ने न्यायिक अधिकारियेां से इस भूमि को फाइनल करने की बात कही थी, ऐसे में हाईकोर्ट जस्टिस और जिले की प्रभारी अधिकारी निर्मलजीत कौर को अंतिम निर्णय के लिए अधिकृत किया।

जस्टिस कौर ने शनिवार को पुरानी शुगर मिल भूमि को देखकर इसे तत्काल मंजूरी करने के संकेत दिए। उनका कहना था कि जिला एवं सत्र न्यायालय प्रशासन और जिला प्रशासन दोनेा संयुक्त रूप से प्रस्तावित बिल्डिंग के मालिकाना हक के संबंध में औपचारिकता पूरी कराई जाएं ताकि हाईकोर्ट प्रशासन इसके लिए बजट की प्रक्रिया शुरू कर सके। इस मौके पर जस्टिस कौर के अलावा सैशन जज देवेन्द्र जोशी, फैमिली कोर्ट के स्पेशल जज महेश पुनेठा, एडीजे संख्या एक सुनील रणवाह, सीजेएम शिव कुमार, बार संघ के अध्यक्ष अजय मेहता, पूर्व सचिव पूर्णराम घोड़ेला, जिला प्रशासन की ओर से एडीएम सिटी वीरेन्द्र वर्मा, उपखण्ड अधिकारी यशपाल आहुजा, सार्वजनिक निर्माण विभाग के एक्सईएन सुमन विनोचा आदि मौजूद थे।

कोशिश यह करना कि बच जाएं सर्किट हाउस और हरियाली

निरीक्षण के दौरान जस्टिस निर्मलजीत कौर ने जब पुरानी शुगर मिल कैम्पस में सर्किट हाउस भवन और वहां हरियाली देखकर खुश हो गई। जस्टिस ने प्रशासनिक और न्यायिक अधिकािरयों को नसीहत देते हुए बोली कि बिल्डिंग कोर्ट के लिए ड्राईंग तैयार करते समय यह कोशिश यह करना कि किसी तरह यह बेहद खूबसूरत सर्किट हाउस और पेड़ों की हरियाली का इलाका बच जाएं। यह हरियाली लंबे समय की मेहतन के बाद बनी है। ऐसे में नए निर्माण के दौरान पर्यावरण का विशेष ध्यान रखने की भी जरूरत है। करीब साठ साल पुराने इस शुगर मिल कैम्पस में अधिकांश पेड़ पर्यावरण को सरंक्षित करने के लिए लगाए गए थे।

इसलिए जरूरी है नई कोर्ट बिल्डिंग

जिला मुख्यालय पर अदालतों का संचालन तीन जगहों पर हो रहा है। गंगासिंह चौक के पास अदालत परिसर है, इस कैम्पस में जैसे जैसे अदालतों की संख्या बढ़ी तो यह कैम्पस संकरा पड़ गया। यहां तक कि वकीलों के बैठने के लिए जगह भी नहीं बची। कोर्ट कैम्पस में पार्किग अधिवक्ताओं के बैठने के केबिन के रूप में तब्दील हो गई। जहां पक्षकारों के लिए बड़ा शैड बनाया था, वहां भी अधिवक्ताओं ने अपना कब्जा जमा लिया। दूसरा कैम्पस सीएचएमओ बिल्डिंग में चल रहा है, यहां फैमिली कोर्ट, एनडीपीएस कोर्ट, एसीबी कोर्ट, कंजूमर कोर्ट, एसीजेएम कोर्ट संख्या दो, एमएसीटी कोर्ट है। तीसरा कैम्पस सिविल लाइन्स में ग्रामीण न्यायालय संचालित हो रहा है। ऐसे में अधिवक्ताओं और पक्षकारों को तीन जगह चक्कर काटने पड़ते है। पार्किग के लिए कलक्ट्रेट और कोर्ट की चारदीवारी के बाहर वाहनों को खड़ा करना मजबूरी बन चुका है।

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