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नया डॉप्लर वैदर राडार लगा नहीं, पुराना खराब

इस कारण सेना और वायु सेना को राडार से कोई सूचना नहीं मिल रही है। इसके अलावा मौसम विभाग को बहुत सी सूचनाएं नहीं मिल पाती है।

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कृषि में देश भर में श्रीगंगानगर अलग पहचान रखता है, लेकिन पिछले कई वर्षों से मौसम विभाग में लगा राडार खराब पड़ा है। इस कारण सेना और वायु सेना को राडार से कोई सूचना नहीं मिल रही है। इसके अलावा मौसम विभाग को बहुत सी सूचनाएं नहीं मिल पाती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि चालीस वर्ष पहले राडार स्थापित किया गया था, इसकी मशीन और अन्य उपकरण खराब हो चुके हैं जो मरम्मत करवाने की स्थिति में नहीं है। इसकी मशीनों पर बड़ी राशि खर्च होती है। इसलिए यहां पर नया राडार लगाने का निर्णय हुआ था, लेकिन वो लंबे समय के बाद सिरे नहीं चढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि साढ़े पांच वर्ष पहले श्रीगंगानगर सहित राज्य के पांच जिलों में डॉप्लर वैदर राडार लगाने की घोषणा कागजी साबित हुई है। इनमें जयपुर में डॉप्लर वैदर राडार लग चुका है। यहां पर राडार स्थापित करने की प्रक्रिया कागजों में ही रेंग रही है। महज वर्तमान मौसम विभाग के पीछे की भूमि का नक्शा एक बार जरूर तैयार कर भिजवाया गया था।

वर्तमान में व्यवस्था

वर्तमान में जिला स्तर पर मौसम की भविष्यवाणी साप्ताहिक रूप से राज्य की राजधानी से जारी की जाती है। मौसम से महत्वपूर्ण सूचना के लिए जयपुर पर ही निर्भर है। इससे कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि से जुड़े अनेक संस्थानों तथा किसान को कृषि कार्यक्रम बनाने में मदद मिलती है। आजकल कुछ निजी कंपनियां भी मोबाइल पर एसएमएस से मौसम की रोजना जानकारी देती है। इसके बदले में किसान को राशि भी देनी होती है।

क्या है डॉप्लर राडार

डॉप्लर वैदर स्टेशन हाईटेक यंत्र है। राजस्थान में दो वैदर राडार सेना के उपयोग के लिए देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास जैसलमेर और श्रीगंगानगर में लगा हुआ है। करीब चार सौ किलोमीटर में मौसम संबंधित बदलाव की जानकारी छह घंटे पहले ही मिल जाती है। इसमें तापमान, वायु दाब, वायु की गति एवं दिशा, जल वाष्प या आद्र्रता, दृश्यता, बादलों का आकार, रंग, ऋतु व मौसम की स्थिति का आंकलन किया जा सकता है।

एक राडार पर 20 करोड़ खर्च का प्लान

मौसम विभाग के अनुसार एक डॉप्लर वैदर राडार पर तमाम सुविधाओं के लिए करीब 20 करोड़ रुपए खर्च करने का प्लान तैयार किया है। इसके लिए तीन-चार मंजिल की 16 मीटर से अधिक ऊंचाई की इमारत का निर्माण करना होगा। वर्तमान में मौसम विभाग की मंजिल पर नया डॉप्लर वैदर राडार नहीं लगाया जा सकता है। भवन की क्षमता इतनी हो कि चार-पांच टन वजन उठा ले तथा इसके लिए खुला वातावरण भी चाहिए।

&राज्य में चार जिलों में डॉप्लर वैदर राडार स्थापित करना था लेकिन अभी तक जयपुर में ही लगा है और श्रीगंगानगर सहित अन्य जगह तृतीय फेज में लगाए जाएंगे और अभी द्वितीय फेज का काम चल रहा है। इसका निर्णय उच्च स्तर पर चल रहा है।

मनोहर लाल रिणवा,

कार्यवाहक, मौसम विज्ञान केंद्र प्रभारी

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