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श्री गंगानगर

अब अपात्रों पर चलेगी कैँची, भूखंड होंगे निलाम

Now ineligible people will be treated with scissors, plots will be auctioned- गौतमबुद्धनगर के प्रथम चरण में भूखंडों के आवंटन का मामला

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श्रीगंगानगर. गौतम बुद्ध नगर के प्रथम चरण के भूखंड आवंटन में चयनित सूची में अपात्रों की अब छंटनी हो जाएगी। नगर विकास न्यास प्रशासन ने 578 भूखंडों से जुड़े आवेदन करने वालों के फार्म बैँक से मंगवाए है। इनके आवदेन में दिए गए श्रेणी और चयनितों की ओर से जमा होने वाले दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इस दौरान कोई भी व्यक्ति अपात्र रहा तो उसका भूखंड निरस्त किया जाएगा। इसके उपरांत न्यास अपनी मीटिंग में इन भूखंडों को नीलामी में ऊंची कीमतों में बेचान कर सकेगा। इससे न्यास के खजाने में राजस्व एकत्र होगा। न्यास सचिव मुकेश बारेठ का कहना है कि इस कॉलोनी के लिए आवेदन की प्रक्रिया जब शुरू की गई थी तब यह साफ तौर पर अंकित किया गया था कि आवेदन जमा होने के बाद छंटनी नहीं होगी। जिन लोगों के नाम से भूखंडों की लॉटरी निकली है, उनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

न्यास सचिव के अनुसार लॉटरी में चयनित को भूखंड देने से पहले उनको डिमांड नोटिस जारी किया जाएगा। इस नोटिस के तीस दिन के भीतर भूखंड की नजराना राशि, लीज व अन्य देय राशि के अलावा आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, राजस्थान का मूल निवास प्रमाण पत्र, आरक्षित वर्ग में आवेदन किया है तो संबंधित दस्तावेज, आय प्रमाण पत्र की मूल कॉपी, जाति प्रमाण पत्र, 50 रुपए के स्टांप पर शपथ पत्र, कर्मचारी होने पर वेतन भोगी सरकारी कर्मचारी का प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज जमा कराने होंगे। इन दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

इस कॉलोनी में भूखंडों की लॉटरी से पहले न्यास के अनुभवी कार्मिकों ने अधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव रखा था कि आवेदन जमा कराने के उपरांत आवेदन फार्मो की जांच की जाएं ताकि अपात्र लोगों की छंटनी हो सके। लेकिन इन अनुभवी कार्मिकों का यह सुझाव दरकिनार कर सीधे ही फार्म स्वीकार किए गए। इसका नतीजा यह रहा कि यह संख्या 14 हजार 211 तक पहुंच गई। इसमें से कई ऐसे लोग भी है जिनके परिवार के नाम से काफी प्रोपर्टी है लेकिन फिर भी भूखंड लेने की कतार में लग गए। इसमें से कईयों के नाम भी लाॅटरी में आ गया है।

करीब एक दशक पहले विभिन्न सात प्राइवेट कॉलोनियों में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए लोगों को भूखंड दिलाने के नाम पर यूआईटी ने पांच-पांच सौ रुपए जमा किए गए थे। इन आवेदनों की संख्या एक साथ अधिक आने पर 345 भूखंडों के लिए लॉटरी निकाली थी। लेकिन अब तक इनके चयनित लोगों को भूखंड तक नहीं मिले। उस समय वंचित रहे 10 हजार 845 लोगों को फिर से नई स्कीम में लॉटरी निकालने की बात कही गई, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। इस लॉटरी से पहले पात्रता सूची नहीं बनाने पर आईडीपी की ओर से आंदोलन शुरू किया गया था। इस संगठन ने लगातार न्यास ऑफिस के आगे पड़ाव ऐसा डाला कि अब तक वहां कई झुग्गी झोपडि़यों के रूप में लोग डेरा जमा चुके है। इन भूखंडों को आवंटन को लेकर संबंधित कॉलोनाइजर्स ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए स्टे ले लिया। अब तक यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।