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अब गांव में ही मशीन बैंक: कम किराए पर मिलेंगे आधुनिक कृषि यंत्र

श्रीगंगानगर.जिले की 65 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग सेंटर (मशीन बैंक) स्थापित किए जा रहे हैं। इनके शुरू होने पर किसानों को गांव स्तर पर ही आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध हो सकेंगे। अभी छोटे और सीमांत किसानों को महंगे यंत्र खरीदने में परेशानी होती थी और कई बार अधिक किराये पर […]

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श्रीगंगानगर.जिले की 65 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग सेंटर (मशीन बैंक) स्थापित किए जा रहे हैं। इनके शुरू होने पर किसानों को गांव स्तर पर ही आधुनिक कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध हो सकेंगे। अभी छोटे और सीमांत किसानों को महंगे यंत्र खरीदने में परेशानी होती थी और कई बार अधिक किराये पर मशीनें मंगवानी पड़ती थीं। समय पर उपकरण नहीं मिलने से जुताई, बुवाई सहित अन्य कृषि कार्य भी प्रभावित होते थे।

आधुनिक तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से किसान नजदीकी ग्राम सेवा सहकारी समिति से ट्रैक्टर संचालित यंत्र, जुताई-बुवाई उपकरण और अन्य आधुनिक मशीनें आवश्यकता अनुसार किराये पर ले सकेंगे। केंद्रों पर ट्रैक्टर व ट्रॉली, रोटावेटर, सीड ड्रिल, जीरो टिल सीड ड्रिल, कल्टीवेटर, हैरो, रीपर, स्प्रे मशीन और मल्चर जैसे यंत्र उपलब्ध रहेंगे।

80 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान

योजना में ग्राम सेवा सहकारी समितियों को कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए प्रति समिति लगभग 10 लाख रुपए की लागत पर अधिकतम 8 लाख रुपए तक अनुदान दिया जाएगा। चार कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) को 30-30 लाख रुपए की परियोजना पर तथा दो आजीविका क्लस्टर लेवल फेडरेशन को भी अनुदान दिया जाएगा। इन परियोजनाओं में लगभग 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा और तीन माह के भीतर कृषि यंत्र स्थापित किए जाएंगे।

फैक्ट फाइल

  • ग्राम सेवा सहकारी समितियां: 65
  • प्रति समिति लागत: 10 लाख रुपएअनुदान: 8 लाख रुपए तक
  • एफपीओ: 4 (प्रति 30 लाख परियोजना)राजीविका क्लस्टर लेवल फेडरेशन: 2
  • अनुदान: अधिकतम 80 प्रतिशत

बजट का गणित

  • कुल परियोजना लागत: 7 करोड़ 90 लाख रुपए
  • कुल अनुदान: 6 करोड़ 32 लाख रुपए

वर्जन

जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित होने से किसानों को आवश्यकता अनुसार कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा और आधुनिक व वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

जगजीत सिंह संधू, कृषि अनुसंधान अधिकारी, श्रीगंगानगर.