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Video : सत्रह डॉक्टरों के हवाले अस्पताल

-राजकीय जिला चिकित्सालय की ओपीडी रही खाली-तीन और डॉक्टर आए ड्यूटी पर

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श्रीगंगानगर.

अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान के तहत सोमवार को भी चिकित्सक अवकाश पर रहे। जिला चिकित्सालय महज सत्रह डॉक्टरों के हवाले रहा। रविवार के मुकाबले डॉक्टरों की संख्या में तीन की वृद्धि हुई, हालांकि इसके बावजूद चिकित्सालय की व्यवस्थाएं चरमराई रहीं। अधिकांश ओपीडी खाली थी, वहीं केवल मेडिसिन ओपीडी के बाहर ही कुछ रोगी नजर आए। यहीं हालात वार्डों के भी थे। वहां अधिकांश बैड सूने रहे। इक्का-दुक्का बैड पर भर्ती रोगियों को भी देर तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा। यहीं, हालात आईसीयू के थे, वहां आठ में से छह बैड पर रोगी तो थे लेकिन चिकित्सक ऑन कॉल ही उपलब्ध हो पा रहे थे।


ये ओपीडी रहे खाली

चिकित्सालय में सोमवार को ईएनटी, चर्म एवं रतिरोग, सर्जिकल, अस्थि रोग आदि की ओपीडी में चिकित्सक नहीं दिखे। केवल मेडिसिन की ओपीडी ही ऐसी थी, जिसमें कुछ रोगी दिखे। यहां कतारें लगी थी, अन्य किसी भी विभाग में रोगी की संख्या बस नाम मात्र की रही। सामान्यत: रोगियों से अटी रहने वाली राजकीय जिला चिकित्सालय की गैलरी भी सोमवार को खाली नजर आईं। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भी रोगियों की संख्या कम थीं।


इमरजेंसी में मिले डॉक्टर

आपाताकालीन इकाई में जरूर डॉक्टरों की व्यवस्था थी। इसके अलावा अन्य विभागों में रोगी डॉक्टरों के बारे में पूछताछ करते ही नजर आए। कुछ विभाग में तो ऐसे रोगी भी पहुंचे जिन्हें संबंधित ओपीडी की पर्ची तो दे दी गई लेकिन वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से वे परेशान होते रहे।


घटी एक्स रे की संख्या

इस बीच चिकित्सालय में एक्स-रे और अन्य जांचों की संख्या में भी कमी आई है। एक्स रे विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि सामान्यत: हॉस्पिटल में प्रतिदिन सवा सौ से डेढ़ सौ रोगी एक्स रे आदि के लिए आते हैं लेकिन डॉक्टरों के छुट्टी पर रहने के बाद आलम यह है कि प्रतिदिन करीब बीस से तीन रोगी ही जांच के लिए पहुंच पाए हैं।


डॉक्टर ही नहीं कौन करे उपचार

डॉक्टरों की संख्या कम रहने के साथ चिकित्सालय प्रशासन की ओर से भी इस बार कोई विशेष प्रबंध नहीं किए गए। कुछ दिन पूर्व हड़ताल होने पर चिकित्सालय प्रशासन ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम सहित विभिन्न व्यवस्थाओं के तहत चिकित्सकों की व्यवस्था यहां की थी। इसके साथ ही आयुर्वेद और होम्योपैथी के चिकित्सकों को भी चिकित्सालय में लगाया था लेकिन इस बार ऐसा कोई विशेष प्रबंध नहीं किया गया। वार्डों में खाली बैड के बारे में जब चिकित्सालय स्टाफ से जानकारी चाही तो उनका कहना था कि डॉक्टर ही नहीं है तो उपचार कौन करे। ऐसे में रोगी स्वयं ही हॉस्पिटल से अन्यत्र जा रहे हैं।