श्रीकरणपुर नगरपालिका में लाखों रुपए की मशीनों का नहीं हो रहा उपयोग, स्वच्छ भारत मिशन को लगाया चूना
श्रीकरणपुर. आम व्यक्ति घर के लिए दस रुपए की वस्तु भी जरूरत के मुताबिक खरीदता है और सलीके से उसकी सार-संभाल करता है लेकिन सरकारी खाते में खरीदी लाखों रुपए की वस्तु के क्या मायने हैं। इसका अनुमान आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां नगरपालिका में लाखों रुपए की लागत से खरीदी गई कंपोस्ट मशीन उपयोग नहीं होने की वजह से कबाड़ हो रही है वहीं, मोबाइल टॉयलट भी डिब्बा बनकर रह गया है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत दो साल पहले करीब 15 लाख रुपए की लागत से गीले कचरे से जैविक खाद बनाने के लिए कंपोस्ट मशीन खरीदी गई लेकिन अब तक इसे केवल एक बार ही उपयोग किया जा सका है। पालिका के एक कार्मिक से मिली जानकारी अनुसार इस मशीन में सब्जियों व फलों केे छिलके, सड़ा-गला खाना, आटा, चावल, दाल, अंडा, मछली, फूल, फूलमालाएं, पत्ती, घास, चायपत्ती के अलावा समस्त प्रकार के शाकाहारी व मांसाहारी अपशिष्ट से जैविक खाद का निर्माण किया जाता है। मशीन में एक बार में करीब एक हजार किग्रा अपशिष्ट डाले जा सकते हंै लेकिन अभी तक एक बार हुए उपयोग से महज 50 किग्रा खाद बनाई गई है।
तीन साल में महज 3 बार उपयोग हुआ मोबाइल टॉयलेट!
करीब तीन साल पहले खरीदे गए मोबाइल टॉयलट वाहन का अभी तक महज तीन बार ही उपयोग किया गया है। जानकारी अनुसार सरकार के एक मंत्री व एक अन्य नेता के आगमन पर इस वाहन को सभा स्थल तक भेजा गया था। इसके अलावा इसका अन्यत्र कहीं उपयोग नहीं किया जा सका है। करीब दस लाख रुपए से खरीदे गए मोबाइल टॉयलेट वाहन का नियमित उपयोग नहीं होने से वर्तमान में यह एक डिब्बा बनकर रह गया है। लोगों का कहना है कि कंपोस्ट मशीन व मोबाइल टॉयलेट का सुचारू उपयोग व पर्याप्त रख-रखाव नहीं होने से इनका समय से पहले ही खराब होने का अंदेशा बना हुआ है।
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यह सही है कोरोनाकाल के दौरान खरीदी गई कंपोस्ट मशीन व मोबाइल टॉयलेट का अधिक प्रयोग नहीं किया गया। योजना बनाकर कंपोस्ट मशीन को उपयोग में लाया जाएगा। वहीं, मोबाइल टॉयलेट का कार्यक्रम विशेष में ही जरूरत रहती है। आवश्यकतानुसार इसका उपयोग किया जाता है।
अजयप्रताप ङ्क्षसह, इओ नगरपालिका श्रीकरणपुर।