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पाक सेना ने वीर सिंह को वापस लौटाया, परिजनों ने छोड़ दी थी आस

Pak army brought back Veer Singh, relatives had given up hope- सीमा पार से पुशबैक हुए मंदबुद्धि युवक से होगी संयुक्त पूछताछ.

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पाक सेना ने वीर सिंह को वापस लौटाया, परिजनों ने छोड़ दी थी आस

पाक सेना ने वीर सिंह को वापस लौटाया, परिजनों ने छोड़ दी थी आस

श्रीगंगानगर. पाकिस्तान सीमा पार गए वीर सिंह के परिजनों ने उसके वापस लौटने की आस छोड़ दी थी लेकिन केसरीङ्क्षहसपुर पुलिस थाने से वीडियो कॉल में उसके सही सलामत को देखा तो सुकून मिला। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के नलवट गांव के रहने वाले वीर सिंह पुत्र भीम सिंह मंदबुद्धि है।

वह अक्सर अपने घर से बिना बताए चला जाता था लेकिन कुछ दिनों बाद वापस घर लौट आता। लेकिन पिछले तीन महीने से अधिक समय से उसका अता पता नहीं मिलने पर परिजनों ने उसके वापस आने की उम्मीद छोड़ दी।

लेकिन केसरीसिंहपुर पुलिस ने वीडियो कॉल से उसके परिजनों को दिखाया तो उन्होंने भगवान का शुक्रिया कहा। इधर, केसरीसिंहपुर पुलिस अब जांच एजेसियों के पास संयुक्त पूछताछ केन्द्र में इस वीर सिंह को पेश करेगी।

पाकिस्तान सेना की भारतीय सीमा सुरक्षा बल के साथ हुई फ्लैग मीटिंग के दौरान मंदबुद्धि वीर सिंह को 5 एस सीमा चौकी पर सुरक्षा बलों को सौंपा गया।

पाकिस्तानी सेना की ओर से पुश बैक करने के बाद बीएसएफ ने इस युवक को केसरीसिंहपुर पुलिस के सुपुर्द किया। केसरीङ्क्षसहपुर थाना प्रभारी सुशील खत्री ने बताया कि वीर सिंह ज्यादा किसी से बात नहीं करता। वह रोटी खाकर सोता है।

वह कैसे आया और कहां से आया, यह ज्यादा बताता नहीं है। पाकिस्तान में तीन माह पहले वह बॉर्डर पार कर चला गया था। वहां कड़ी पूछताछ में भी पाक सेना ने उसे मंदबुद्धि का बताते हुए वापस पुशबैक करने का निर्णय लिया।

पुलिस ने किया परिजनों से संपर्क केसरीसिंहपुर पुलिस ने मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में बेडि़या पुलिस से संपर्क किया था।

बेडि़या थाने के पुलिस कर्मियों ने नलवट गांव के सरपंच देवीसिंह से वीर सिंह के बारे में बताया। वहां से वीडियो कॉल कराई गई तो वीर सिंह के परिजनों ने देखा।

उसके परिवार में उसकी पत्नी सोनूबाई के अलावा दो बेटियां, मां और भाई है।

इधर, सीआईडी जोन की एडिशनल एसपी दीक्षा कामरा ने बताया कि सोमवार को वीरसिंह के आने के बाद ही उससे पूछताछ की जाएगी। वीरसिंह पाकिस्तान में तीन महीने पहले पहुंच गया था।

उसके परिजन काफी गरीब है, एेसे में उसके पास रेल या बस का किराया भी नहीं था।

यहां तक कि लॉक डाउन में वाहनों की आवाजाही भी नहीं थी कि वह किसी ट्रक या अन्य वाहन के माध्यम से बॉर्डर तक जा सके।

परिजनों ने सरपंच से सवाल किया कि नलवट गांव से पाक सीमा तक करीब दो हजार किमी दूर वह कैसे पहुंच गया। पाकिस्तान सीमा के अंदर किस रास्ते पहुंचा, यह पहेली बना हुआ है।