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सीजफायर के तुरंत बाद पाकिस्तान ने तोड़ा वादा, 1971 में भी युद्धविराम के बाद की थी ‘ना-पाक’ हरकत, जानें इतिहास

India-Pakistan Ceasefire : ऑपरेशन सिंदूर के चलते भारत-पाकिस्तान के मध्य तनाव चल रहा है। शनिवार शाम दोनों देशों में सीजफायर पर सहमति हुई। तीन घंटे बाद ही पाकिस्तान ने ना-पाक हरकत शुरू कर दी। पाकिस्तान का वादे से मुकरने का इतिहास रहा है। जानें पूरी स्टोरी।

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Pakistan Broke its Promise immediately After Ceasefire in 1971 War Ceasefire Committed an Na Pak Act know History

श्रीकरणपुर. गांव नग्गी सीमा क्षेत्र में शहीद स्मारक पर लहरा रहा 72 फीट ऊंचा तिरंगा। हाल ही 24 अप्रेल को इसका लोकार्पण हुआ। (इनसेट) सेवानिवृत्त कर्नल एसएस सैनी। वर्ष 1971 में युद्ध विराम के बाद हुई लड़ाई में सेना के तकनीकी अधिकारी के रूप में तैनात थे। बाद में कर्नल पद से रिटायर हुए।

प्रवीण राजपाल
India-Pakistan Ceasefire :
ऑपरेशन सिंदूर के चलते भारत-पाकिस्तान के मध्य तनाव चल रहा है। शनिवार शाम दोनों देशों में सीजफायर पर सहमति हुई। तीन घंटे बाद ही पाकिस्तान ने नापाक हरकत शुरू कर दी। पाकिस्तान ने एक बार फिर से सीजफायर का उल्लंघन कर दिया। वर्ष 1971 में भी पाक ने युद्ध विराम के बाद ठीक ऐसी ही ‘ना-पाक’ हरकत की थी। 28 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध विराम के बाद नग्गी क्षेत्र में धोरों को मुक्त कराने के लिए हुई लड़ाई इसी का नतीजा था। युद्ध विराम के बाद हुई यह घटना इतिहास में सैंड ड्यून के नाम से दर्ज है।

ट्रैक्टरों के साइलेंसर निकाल बना दिए टैंक

1971 में युद्ध विराम के बाद हुई घटना से सीमा पर टैंक व पर्याप्त बटालियन नहीं होने से बीएसएफ की चिंता बढ़ गई। मामले में प्रशासन व पुलिस ने स्थानीय नागरिकों से बैठक की। सत्यनारायण भाटी नामक युवक ने ट्रैक्टरों के साइलेंसर निकालकर चलाने की सलाह दी। इस पर आस-पास के गांवों से करीब दो दर्जन ट्रैक्टर जुटाए गए। युद्ध विराम के 10 दिन बाद 27 दिसंबर को सीमा क्षेत्र में ये ट्रैक्टर चलाए तो पाकिस्तानी सेना टैंकों की आवाज समझ भ्रमित होकर एकबारगी पीछे हट गई और भारतीय सेना को यहां पहुंचने का समय मिल गया।

पैरा बटालियन ने किया था हमला

1971 का भारत-पाक युद्ध समाप्त हुए दस दिन बीत चुके थे। किसी को यह गुमान नहीं था कि युद्ध में करारी हार के बाद पाक सेना भारतीय सीमा में घुसने का दुस्साहस भी कर सकती है। 26 दिसंबर 1971 को पाक सेना भारतीय सीमा में घुसी और रेतीले धोरों से घिरे एक वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस पर सेना की 4-पैरा बटालियन ने 28 दिसंबर की सुबह ४ बजे हमला बोला और दो घंटे की लड़ाई में दुश्मन को घर का रास्ता दिखा दिया।

सीजफायर होने पर लोगों में खुशी का माहौल

सीजफायर होने पर लोगों में खुशी का माहौल है। एलओसी पर गोलीबारी की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। 1971 में युद्ध विराम के बाद नग्गी में पाकिस्तान की ओर से हुई नापाक हरकत आज भी जेहन में है। तकनीकी अधिकारी के रूप में तब मैं भी वहीं तैनात था। ऐसे में दुश्मन पर भरोसा करना मुश्किल है।
एसएस सैनी (77 वर्ष), रिटायर्ड कर्नल, पंजाब

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