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व्यापारी और यात्री कर रहे स्वाइप मशीनों से परहेज

कैशलैस सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए रेलवे स्टेशन और पार्सल घर में लगाई गई स्वाइप मशीनें यात्रियों और व्यापारियों को रास नहीं आई।

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श्रीगंगानगर.

कैशलैस सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए रेलवे स्टेशन और पार्सल घर में लगाई गई स्वाइप मशीनें यात्रियों और व्यापारियों को रास नहीं आई। रेलवे प्रशासन की ओर से एक साल तक प्रयास करने के बावजूद स्वाइप मशीनों का प्रयोग नहीं बढ़ पाया। रेलवे स्टेशन के जनरल टिकट विंडो, पार्सल और रिजर्वेशन ऑफिस में 2-2 स्वाइप मशीनें लगी हुई है। जनरल टिकट विंडो पर कोई भी यात्री टिकट नहीं लेता। इसी तरह, पार्सल घर में भी माल बुक करवाते समय व्यापारी इन स्वाइप मशीनों का उपयोग नहीं करते।

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आम व्यापारी स्वाइप मशीन के बजाय नकद भुगतान को उचित मानते हैं। आम यात्री को टिकट लेने के लिए पहले स्वाइप मशीन में कार्ड को स्वाइप करवाना होता है और उसके बाद उसमें पिन नंबर डाले जाते हैं। मशीन से स्लिप बाहर आने के बाद टिकट प्रिंट करके दी जाती है। इस प्रक्रिया में दो-तीन मिनट लगते हैं। आम यात्री इस प्रक्रिया से गुजरने को तैयार नहीं होता और वह नकद भुगतान कर ही यात्री टिकट खरीदने को बेहतर मानता है।

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रेलवे के सीएमआई वेदप्रकाश शर्मा बताते हैं कि उन्होंने व्यापारियों को पार्सल घर में स्वाइप मशीन का उपयोग करने के लिए बार-बार प्रेरित किया लेकिन प्रयास सिरे नहीं चढ़े।पार्सल घर में दो स्वाइप मशीनें लगी हुई हैं। । फिलहाल उनका उपयोग नहीं के बराबर है। उधर, रिजर्वेशन ऑफिस के उम्मेद पाल सिंह ने बताया कि तत्काल टिकटों के लिए स्वाइप मशीन का उपयोग बिल्कुल भी नहीं किया जाता। रिजर्वेशन के लिए माह में कम से कम 25 यात्री अवश्य स्वाइप मशीन का प्रयोग करते हैं। इसी तरह की स्वाइप मशीनें कुछ और स्टेशनों पर भी लगी है मगर आम आदमी इसका प्रयोग नहीं कर रहा।

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