श्रीगंगानगर. प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत इलाके में लोगों को मालिकाना हक के लिए पट्टा वितरण में राज्य सरकार ने कई बार राहत देने का प्रयास किया लेकिन इसका धरातल पर असर काफी कम नजर आया है। यही वजह रही कि जिला मुख्यालय पर पट्टे के आंकड़ों की तुलना की जाए तो नगर परिषद और यूआइटी में जमीन-आसमान का फर्क नजर आने लगा है। यूआइटी ने जहां करीब आठ हजार लोगों को पट़टे वितरित किए हैं। वहीं नगर परिषद प्रशासन की ओर से जारी पट्टों को आंकड़ा डेढ़ हजार भी नहीं पहुंचा है।इधर, न्यास सचिव मुकेश बारेठ का कहना है कि जब प्रशासन शहरों के संग अभियान की शुरुआत हुई थी तब बीकानेर संभाग को दस हजार पट्टे जारी करने का लक्ष्य तय किया था। इलाके के लोगों ने सहयोग किया तो अकेले न्यास ने आठ हजार पट्टे बना दिए है। अगले दो महीने में दस हजार तक पट़टे जारी हो जाएंगे।
बारेठ का दावा है कि हमने बीकानेर यूआइटी के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया गया है। इधर, नगर परिषद सभापति करुणा चांडक ने कहा कि उनका प्रयास शहर के उस प्रत्येक नागरिक को मकान का मालिकाना हक दिलाने का है जो अब तक इस अधिकार से वंचित है। नगर परिषद स्थित कार्यालय में प्रशासन शहर के संग अभियान के तहत पचास नागरिकों को भवन के पट्टे वितरित किए गए। इस दौरान पूर्व पार्षद हरविन्द्र सिंह पांडे, पूर्व पार्षद अमरजीत सिंह गिल और सुरेन्द्र वर्मा आदि मौजूद थे।
इस बीच, लोगों का कहना है कि जोनल प्लान नहीं बनने के कारण शहर में पट़टें बनाने की प्रक्रिया धीमी चली है। जोनल प्लान बनाने का खाका करीब एक साल से चल रहा है लेकिन अब तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। इस संबंध में जयपुर की एक ठेका कंपनी को अधिकृत किया था, इसे दो करोड़ रुपए सर्वे के एवज में भुगतान किया जाएगा। लेकिन ठेकेदार से सरकार ने अभी तक सवाल जवाब तक नहीं किए है।
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अब तक के पट्टों का गणित
श्रीगंगानगर यूआइटी 7888
श्रीगंगानगर नप 1430
बीकानेर यूआइटी 6048