
श्रीगंगानगर.
अंतरराष्ट्रीय सीमा के जिले में मादक पदार्थ तस्करी, संदिग्ध गतिविधियों व संगीन वारदात के खुलासों के लिए अब पुलिस की मदद करने के लिए बंगलूरू से रोमियो व जानू को यहां लगाया गया है। पिछले दो साल से यहां डॉग स्क्वॉयड का अभाव बना हुआ था। इसके चलते कई बड़ी वारदातों के खुलासे में मदद से बीकानेर से डॉग स्क्वॉयड बुलाना पड़ता था या बिना इसके ही काम चलाना पड़ रहा था। पुलिसकर्मियों ने बताया कि पुलिस लाइन में डॉग स्क्वॉयड शाखा में दो स्नाइपर डॉग थे।
जिनमें से एक ट्रेकर व दूसरा नॉरकोटिक्स पदार्थ सूंधने में एक्सपर्ट था। जिनकी वर्ष 2015 में मौत हो गई। इसके बाद से यहां डॉग स्क्वॉयड नहीं आया। दो साल के दौरान संगीन वारदातों के खुलासे व आरोपितों का पता लगाने के लिए बीकानेर से डॉग स्क्वॉयड बुलाया जाता था। इसमें काफी समय लगता था। जिले के डॉग स्क्वॉयड की कमी पुलिस को खल रही थी। इसके चलते प्रस्ताव भेजा गया। पहले टेकनपुर बीएसएस ट्रेनिंग सेंटर से डॉग स्क्वॉयड लाने की कवायद चल रही थी लेकिन वहां से प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉयड नहीं मिल पाया।
बंगलूरू से आए रोमियो व जानू
जिले के लिए बंगलूरू स्थित प्रािश्क्षण केन्द्र से २७ दिसंबर को रोमियो (मेल) व जानू (फीमेल) को राजस्थान भेजा गया। दोनों डॉग्स को बंगलूरू में प्रशिक्षण दिया गया था। इनको अब यहां लाने के बाद यहां पुलिस लाइन में नियमित पे्रक्टिस कराई जा रही है। इनके केयर टेकर में पुलिसकर्मियों ने बताया कि अभी नए होने के कारण दोनों डॉग्स काफी अग्रेसिव हैं। अभी कुछ दिन की प्रेक्टिस के बाद सामान्य हो जाएंगे। इनमें से एक ट्रेकर व दूसरा नॉरकोटिक्स संूघने में एक्सपर्ट है।
जयपुर में हुआ प्रशिक्षण पूरा
बंगलूरू से पहले से इन डॉग स्क्वॉयड को जयपुर लाया गया था। जहां उनको प्रशिक्षकों की ओर से प्रशिक्षण दिया गया था। कई दिन के प्रशिक्षण के बाद डॉग्स को प्रशिक्षित हैण्डलरों के साथ ही श्रीगंगानगर की पुलिस लाइन में लाया गया है। जहां अब उनकी प्रेक्टिस चल रही है।
बेलज्यिम के डॉग्स
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बंगलूरू से लाए गए दोनों डॉग्स बेलज्यिम के जर्मन शैफर्ड नस्ल से हैं। यह नस्ल काफी खतरनाक होती है। इस नस्ल के डॉग्स लोमडी की तरह काफी चालाक होते हैं। इनको प्रशिक्षण देने में भी आसानी रहती है और प्रशिक्षित होने के बाद ये टॉस्क को तेजी से पूरा करते हैं।
इनका कहना है
पुलिस को दो डॉग स्क्वॉयड मिले हैं। यह बंगलूरू से आए हैं और इनकी ट्रेनिंग जयपुर में हुई है। इसके बाद श्रीगंगानगर पुलिस लाइन लाया गया है। यहां करीब दो साल से डॉग स्क्वॉयड की कमी चल रही थी। अब संगीन वारदातों के खुलासे में काफी मदद मिलेगी। सुरेन्द्र सिंह राठौड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर
Updated on:
03 Jan 2018 08:00 am
Published on:
03 Jan 2018 07:16 am
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