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घटिया निर्माण से उजागर हुई लापरवाही, 600 फीट सडक़ बनी भ्रष्टाचार की मिसाल

श्रीगंगानगर.ग्रामीण विकास के नाम पर खर्च हो रही सरकारी राशि की हकीकत मम्मडख़ेड़ा की 600 फीट इंटरलॉकिंग सडक़ ने उजागर कर दी है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि निर्माण में उपयोग किए गए सीमेंट ब्लॉक्स गुणवत्ता मानक से करीब तीन गुना कमजोर पाए गए। अब बड़ा सवाल यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में […]

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श्रीगंगानगर.ग्रामीण विकास के नाम पर खर्च हो रही सरकारी राशि की हकीकत मम्मडख़ेड़ा की 600 फीट इंटरलॉकिंग सडक़ ने उजागर कर दी है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि निर्माण में उपयोग किए गए सीमेंट ब्लॉक्स गुणवत्ता मानक से करीब तीन गुना कमजोर पाए गए। अब बड़ा सवाल यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में आखिर जिम्मेदार कौन है-ग्राम विकास अधिकारी, सरपंच (प्रशासक), पंचायत समिति के तकनीकी अधिकारी या फिर ब्लॉक स्तर का प्रशासन ? शिकायत के बाद हुई तकनीकी जांच में ब्लॉक्स की औसत दबाव सहन क्षमता 98.82 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर पाई गई, जबकि निर्धारित मानक 305.91 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर है। यानी निर्माण सामग्री स्पष्ट रूप से अनुपयुक्त थी। इसके बावजूद सडक़ का निर्माण पूरा होना निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इतनी बड़ी गुणवत्ता खामी

नियमों के अनुसार निर्माण कार्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी ग्राम विकास अधिकारी और पंचायत स्तर पर होती है,जबकि तकनीकी स्वीकृति और गुणवत्ता की निगरानी पंचायत समिति के कनिष्ठ तकनीकी सहायक और सहायक अभियंता की होती है। इसके साथ ही बीडीओ (विकास अधिकारी) की भूमिका पूरे कार्य की प्रशासनिक निगरानी की होती है। ऐसे में इतनी बड़ी गुणवत्ता खामी सामने आना कई स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत की आशंका को जन्म देता है।

संबंधित आपूर्तिकर्ता फर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई

जिला परिषद सीईओ के निर्देश पर गठित जांच समिति में ईजीएस अधिशासी अभियंता रामेश्वर लाल बेनीवाल,वरिष्ठ लेखाधिकारी विनीत कुमार और अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी भूपेंद्र कुमार शामिल थे ने स्पष्ट अनुशंसा की है कि सडक़ में लगे सभी ब्लॉक्स हटाकर मानक अनुसार पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही संबंधित आपूर्तिकर्ता फर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। हालांकि अब तक संबंधित अधिकारियों पर प्रत्यक्ष दंडात्मक कार्रवाई स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन उनकी भूमिका जांच के दायरे में है।

वित्तीय जवाबदेही भी तय होना जरूरी

यह भी सामने आया है कि निर्माण कार्य में खर्च हुई राशि सरकारी मद से जारी की गई थी, ऐसे में वित्तीय जवाबदेही भी तय होना जरूरी है।यह मामला केवल एक सडक़ का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी गड़बडिय़ां भविष्य में भी दोहराई जाती रहेंगी।

जिला स्तरीय जांच का निष्कर्ष

600 फीट सडक़ में घटिया निर्माण की पुष्टि,सभी ब्लॉक्स हटाकर पुनर्निर्माण के निर्देश आपूर्तिकर्ता फर्म पर कार्रवाई या ब्लैकलिस्ट की सिफारिश व ग्राम पंचायत व तकनीकी अधिकारियों की भूमिका जांच में शामिल आदि रिपोर्ट जिला परिषद सीईओ को सौंपी गई है।

तकनीकी जांच में क्या सामने आया

-चार नमूनों की जांच: 116.78, 115.92, 62.98, 99.60 किग्रा/ स्क्वायर सेेटीमीटर

-औसत क्षमता: 98.82 किग्रा/स्क्वायर सेेटीमीटर
-निर्धारित मानक: 305.91 किग्रा/स्क्वायर सेेटीमीटर

-निष्कर्ष: सामग्री उपयोग के लिए अनुपयुक्त

वर्जन

ग्राम पंचायत मम्मडख़ेड़ा के निर्माण कार्य की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इसमें दोषी पाए गए कार्मिकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-गिरधर,मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, श्रीगंगानगर